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मिलिए रोहन मूर्ति से जिन्होंने 737940 करोड़ रुपये की इंफोसिस छोड़ी, जानें अब कहां काम कर रहे हैं

इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति के बेटे रोहन मूर्ति ने पारिवारिक कंपनी छोड़कर अपनी खुद की नई राह चुनी. आइए जानते हैं कि वह अब किस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं और उनकी सफलता की कहानी.

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मिलिए रोहन मूर्ति से जिन्होंने 737940 करोड़ रुपये की इंफोसिस छोड़ी, जानें अब कहां काम कर रहे हैं

Rohan Murthy

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इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति देश के सबसे बड़े और प्रभावशाली अरबपतियों में से एक हैं. लेकिन इन सब के बावजूद, उनके बेटे रोहन मूर्ति ने अपनी खुद की पहचान बनाने का फैसला किया. उन्होंने पारिवारिक कारोबार से हटकर अपनी एक नई डिजिटल कंपनी की शुरुआत की. रोहन की यह यात्रा एक प्रेरणा है, जो साबित करती है कि सफलता सिर्फ पैतृक नहीं, बल्कि मेहनत और नवाचार के जरिए भी पाई जा सकती है. तो चलिए जानते हैं रोहन मूर्ति की सफलता की अनकही कहानी.

करियर की शुरुआत

रोहन मूर्ति की शिक्षा की शुरुआत बैंगलोर के बिशप कॉटन बॉयज स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की. अपनी उच्च शिक्षा के लिए वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय गए, जहां उन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की. उनके शोध का मुख्य विषय 'ऑपर्च्युनिस्टिक वायरलेस नेटवर्क' था, जो तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान था.

इंफोसिस छोड़ने का निर्णय

रोहन मूर्ति ने 2014 में इंफोसिस के Vice President पद से इस्तीफा देकर अपनी नई कंपनी शुरू करने का फैसला किया. उनका लक्ष्य था अपनी खुद की पहचान बनाना और एक ऐसा कारोबार खड़ा करना, जो न केवल आधुनिक तकनीकी समाधान प्रदान करे, बल्कि डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा दे. इस तरह, उन्होंने Soroco नामक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी की स्थापना की. यह कंपनी ए.आई. और ऑटोमेशन के क्षेत्र में काम कर रही है.


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भविष्य की दिशा

Soroco ने तेजी से वृद्धि की और 2022 में इसकी आय लगभग 18 मिलियन डॉलर (149 करोड़ रुपये) रही, हालांकि कंपनी ने कभी अपने वित्तीय परिणाम सार्वजनिक नहीं किए. रोहन मूर्ति की कंपनी ने पिछले कुछ सालों में डिजिटल और ए.आई. के क्षेत्र में कई नई ऊंचाइयों को छुआ है, और उनकी अगुआई में यह कंपनी लगातार नए कीर्तिमान बना रही है. 

युवाओं के लिए प्रेरणा 

रोहन मूर्ति की सफलता यह साबित करती है कि अपनी पहचान बनाने के लिए खुद का रास्ता चुनना और कठिन परिश्रम करना कितना महत्वपूर्ण है. पारिवारिक व्यवसाय से बाहर निकलकर उन्होंने अपनी कंपनी Soroco के जरिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ए.आई. के क्षेत्र में नई दिशा दिखाई. उनका उद्यमिता सफर युवाओं को प्रेरित करता है कि वे केवल पारिवारिक नाम से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और नवाचार से भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं.

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