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महाराष्ट्र सरकार ने प्राइवेट कर्मचारियों के काम के घंटों में बढ़ोतरी की है. मंत्रिमंडल ने श्रम कानूनों में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जानें कहां काम करने वाले वर्कर्स पर कैसा होगा असर...
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने श्रम कानूनों में संशोधन को मंजूरी दे दी है. इससे प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए अधिकतम दैनिक काम के घंटे बढ़ जाएंगे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने फैक्ट्रीज एक्ट, 1948 और महाराष्ट्र शॉप्स एंड एस्टिब्लिशमेंट (रेगुलेशन ऑफ इंपलॉयमेंट एंड कंडीशन्स ऑफ सर्विस) एक्ट, 2027 में बदलावों को मंज़ूरी दे दी.
ये सुधार राज्य को कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा की तर्ज पर लाएंगे, जहां पहले ही इसी तरह के उपाय लागू किए जा चुके हैं.
फैक्टरियां: दैनिक काम के घंटे नौ से बढ़कर 12 हो जाएंगे और पांच घंटे के बजाय छह घंटे के बाद ब्रेक की अनुमति होगी. कर्मचारियों की लिखित सहमति के अधीन कानूनी ओवरटाइम सीमा प्रति तिमाही 115 से बढ़कर 144 घंटे हो जाएगी. साप्ताहिक कार्य घंटे भी 10.5 से बढ़कर 12 घंटे हो जाएंगे.
दुकानें और प्रतिष्ठान (20 या अधिक कर्मचारी): दैनिक घंटे नौ से बढ़कर 10 हो जाएंगे, ओवरटाइम सीमा 125 से बढ़कर 144 घंटे हो जाएगी और आपातकालीन ड्यूटी 12 घंटे तक हो जाएगी.
20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठान: रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की अब जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय नियोक्ताओं को अधिकारियों को एक साधारण सूचना देनी होगी.
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सरकार के अनुसार इस कदम का उद्देश्य बिजनेस को आसान बनाना, इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना, रोजगार पैदा करना और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना है. कर्मचारियों को ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन मिलता रहेगा.
राज्य श्रम विभाग ने पिछले हफ्ते प्रस्ताव प्रस्तुत किया था. विभाग ने तर्क दिया कि ये बदलाव एक अधिक लचीला वर्क स्पेस तैयार करेगा, कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों की चिंताओं को दूर करेगा और वर्कफोर्स में महिलाओं के लिए स्थितियों में सुधार करेगा.
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