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8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार कर रहे केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी अपडेट आई है.
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है. सरकार ने शनिवार (13 जून 2026) को 8वें वेतन आयोग के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' यानी उन नियमों और शर्तों को मंजूरी दे दी है, जिसके आधार पर नया वेतन ढांचा तैयार किया जाएगा. इस बड़े कदम से केंद्र सरकार के करीब 55 लाख मौजूदा कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनभोगियों की सैलरी, पेंशन और मिलने वाले भत्तों में बड़ा बदलाव हो सकता है.
सरकार ने इस नए आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया है. इस बार चर्चा सिर्फ वेतन बढ़ने की नहीं है, बल्कि कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार पूरा पे-स्ट्रक्चर ही बदल सकती है. इस पूरे बदलाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फिटमेंट फैक्टर की होने वाली है. बहुत से लोग नहीं जानते कि फिटमेंट फैक्टर दरअसल एक तरह का गुणांक होता है. इसी के आधार पर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है.
अगर हम थोड़ा पीछे मुड़कर देखें, तो साल 2016 में लागू हुए 7वें वेतन आयोग के समय सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था. इसका सीधा गणित यह था कि अगर उस समय किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो इस फिटमेंट फैक्टर से गुणा होने के बाद वह सीधे ₹38,550 हो गई थी. अब 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी संगठनों की मांग है कि इस फिटमेंट फैक्टर को और ज्यादा बढ़ाया जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों को सही राहत मिल सके.
मौजूदा स्थिति की बात करें तो 8वां वेतन आयोग इस समय बेहद सक्रियता से काम कर रहा है. आयोग के सदस्य अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं. इस दौरान वे विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी संघों और यूनियनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं, ताकि जमीनी स्तर पर उनकी जरूरतों को समझा जा सके. कर्मचारी यूनियनें भी आयोग के सामने अपने प्रस्ताव और मांग पत्र सौंप रही हैं.
विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से जो मुख्य मांगें निकलकर सामने आ रही हैं, उनमें सिर्फ बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी ही शामिल नहीं है. कर्मचारी इस बार रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों और भत्तों में भी बड़े और व्यावहारिक सुधारों की मांग कर रहे हैं. चूंकि यह मामला सीधे तौर पर सवा करोड़ से अधिक परिवारों की जेब और उनके भविष्य से जुड़ा है, इसलिए हर छोटे-बड़े अपडेट पर कर्मचारियों की नजर बनी हुई है.
आने वाले 18 महीनों में आयोग सभी पक्षों की मांगों और देश की आर्थिक स्थिति का आकलन करके अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद नए वेतन ढांचे की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी.