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जिन लोगों को हर महीने सैलरी मिलती है, वे लोग आईटीआर फॉर्म 1 भरते हैं. जिसकी आय 50 लाख रुपये तक है, वह इस फॉर्म को भर सकता है. ये धनराशि चाहे सैलरी से आए या पेंशन या फिर घर की संपत्ति से या किसी और जरिए जैसे बेंक खाते से मिल रहा ब्याज.
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026, अब नजदीक है. ऐसे में पहली बार आईटीआर भरने जा रहे लोगों के लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि कौन सा फॉर्म किसके लिए है. अक्सर लोगों में इसे लेकर कंफ्यूजन रहता है कि उन्हें कौन सा फॉर्म भरना है.
क्या होता है ITR?
पहली बार आईटीआर भर रहे लोगों के लिए पहले ये जानना बहुत जरूरी है कि ये होता क्या है. आईटीआर का पूरा नाम इनकम टैक्स रिटर्न है, जिसका फॉर्म भरकर भारत के आयकर विभाग को जमा करना होता है. फॉर्म में व्यक्ति को अपनी आय, डिडक्शन, साल के दौरान चुकाए गए टैक्स और बैंक खातों की पूरी जानकारी देनी होती है. यहां साल का मतलब वित्त वर्ष है, जो 1 अप्रैल से शुरू होता है और अगले साल 31 मार्च को समाप्त होता है.
कितने तरह के आईटीआर फॉर्म?
ITR 1: जिन लोगों को हर महीने सैलरी मिलती है, ये फॉर्म उनके लिए है. जिसकी आय 50 लाख रुपये तक है, वह इस फॉर्म को भर सकता है. ये धनराशि चाहे सैलरी से आए या पेंशन या फिर घर की संपत्ति से या किसी और जरिए जैसे बेंक खाते से मिल रहा ब्याज. इसके अलावा 5 हजार रुपये तक की कृषि आय भी इसमें शामिल है.
ITR 2: ये फॉर्म तब भरा जाता है, अगर आपकी आय बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम से नहीं आ रही होती है. ये फॉर्म वो लोग भर सकते हैं जिनकी आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है, शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन होता है, दो से ज्यादा प्रॉपर्टी से इनकम होती है और विदेश में प्रॉपर्टी है या वहां किसी कंपनी के डायरेक्टर हैं तो.
ITR 3: यह फॉर्म उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जो व्यापार या पेशे से प्रॉफिट और गेन से कमाई करते हैं.
ITR 4: 44AD, 44ADA या 44AE के तहत यह फॉर्म वे व्यक्ति, एचयूएफ और फर्म भरती हैं, जो व्यवसाय करती हैं या प्रोफेशनल होते हैं. जैसे डॉक्टर, वकील या सीए.
ITR 5: इस फॉर्म को विभिन्न प्रकार की संस्थाएं और संगठन भर सकते हैं. इसे पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), एसोसिएशन ऑफ पर्संस (AOPs), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स (BOI) और आर्टिफिशियल ज्यूरिडिकल पर्सन (AJP) भर सकते हैं.
ITR 6: जिन कंपनियों को आयकर अधिनियम 1961 की धारा 11 के तहत कोई कर छूट नहीं मिलती है, वे इस फॉर्म को भरती हैं.
ITR 7: धर्मार्थ, धार्मिक ट्रस्ट, राजनीतिक दल, अनुसंधान संघ, न्यूज एजेंसी या इसी तरह के संगठन वाली कंपनियां और व्यक्ति इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.
गलत फॉर्म भरा तो नहीं आएगा रिटर्न?
अगर कोई गलत फॉर्म में आईटीआर फाइल करता है तो आयकर विभार एक मौका देता है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से सेक्शन 139(9) के तहत नोटिस मिल सकता है, जिसमें बताया जाएगा कि रिटर्न डिफेक्टिव रिटर्न हो गया, उसे सुधार लें.
नोटिस में बताया जाएगा कि फॉर्म गलत क्यों है और सही फॉर्म भरने के लिए निर्देश भी दिए जाएंगे, इसके लिए 15 दिन का समय मिलता है. अगर तय समय में फॉर्म में संशोधन नहीं किया गया तो रिटर्न शून्य मान लिया जाएगा. यानी आयकर विभाग ये मान लेगा कि रिटर्न कभी भरा ही नहीं गया. ऐसे में विलंब शुल्क लग सकता है, अगर टैक्स रिफंड बनता है तो वापस मिलने में देरी हो सकती है.
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