बिजनेस
जहां एक तरफ बड़ी संख्या में लोग इन साधारण चीजों को बेचकर सिर्फ अपनी रोजी-रोटी चला पाते हैं, वहीं कुछ दूरदर्शी एंटरप्रेन्योर्स इसी साधारण धंधे को करोड़ों के साम्राज्य में बदल देते हैं.
अक्सर हम अपने आसपास देखते हैं कि कुछ चीजें हर गली-मोहल्ले की दुकानों, रेहड़ियों या ठेलों पर बिकती नजर आती हैं. चाय, समोसा, चाट-गोलगप्पे या पानी की बोतल जैसी ये चीजें इतनी आम होती हैं कि हमें लगता है कि इनमें भला क्या रखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसी आम सी चीज को बेचकर जहां कई लोग अपनी रोजी-रोटी चला पाते हैं, वहीं कुछ गिने-चुने लोग ऐसे भी होते हैं जो इसी धंधे से करोड़पति बन जाते हैं?
बिजनेस की दुनिया का यह एक ऐसा सच है जो हमें एग्जीक्यूशन यानी काम को करने के तरीके की ताकत समझाता है. स्टार्टअप इंडिया के केस स्टडीज के आधार पर आपको बताते हैं कि आखिर हर नुक्कड़ पर बिकने वाले सामान से कुछ लोग कैसे करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लेते हैं.
जो लोग सिर्फ हर गली में दुकान खोलकर बैठते हैं, उनका नजरिया सीमित होता है. वे केवल उस दिन की कमाई और ग्राहकों को देखते हैं. इसके उलट, जो लोग आगे चलकर करोड़पति बनते हैं, वे पहले दिन से एक सिस्टम बनाने पर काम करते हैं.
उदाहरण के लिए भारत में चाय को ही ले लीजिए. हर नुक्कड़ पर चाय की टपरी मिल जाएगी. लेकिन एमबीए चायवाला या चाय सुट्टा बार जैसे स्टार्टअप्स ने क्या किया? उन्होंने चाय नहीं बदली, बल्कि चाय बेचने का तरीका, उसका माहौल, हाइजीन और ब्रांडिंग बदल दी. उन्होंने एक आम प्रोडक्ट को एक अनुभव में बदल दिया. जब आप किसी चीज को ब्रांड बना देते हैं, तो लोग उसकी सही कीमत देने को तैयार हो जाते हैं.
हर गली में बिकने वाली चीजों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उनके स्वाद या क्वालिटी का कोई भरोसा नहीं होता. आज समोसा अच्छा मिला, तो शायद कल वैसा न मिले. लेकिन करोड़पति बनने वाले बिजनेसमैन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का इस्तेमाल करते हैं.
मैकडॉनल्ड्स या हल्दीराम जैसी कंपनियों ने यही किया. आप देश के किसी भी कोने में चले जाएं, आपको उनके मुख्य प्रोडक्ट्स का स्वाद एक जैसा ही मिलेगा. ग्राहकों को ये भरोसा होता है कि वे जब भी वहां जाएंगे, उन्हें वही क्वालिटी मिलेगी. यही भरोसा किसी छोटे से काम को करोड़ों के टर्नओवर में बदल देता है.
आम दुकानदार सिर्फ अपनी एक दुकान तक सीमित रहता है, जबकि एक दूरदर्शी बिजनेसमैन हमेशा यह सोचता है कि इस मॉडल को 100 या 1000 जगहों पर कैसे ले जाया जाए. वे फ्रेंचाइजी मॉडल का सहारा लेते हैं या अपनी नई ब्रांचेज खोलते हैं. जब एक ही चीज कई जगहों पर बिकने लगती है, तो मुनाफे का गणित पूरी तरह बदल जाता है. बिजनेस गुरु रॉबर्ट कियोसाकी की बेस्टसेलर किताब रिच डैड पुअर डैड किताब का मुख्य सिद्धांत यही सिखाता है कि आप क्या बेचते हैं यह मायने नहीं रखता, बल्कि आप उसे बेचने का क्या सिस्टम बनाते हैं, उससे आप अमीर बनते हैं.
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट्स कहती है कि कोई भी बिजनेस छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसे बड़ा बनाती है आपकी रणनीति, मार्केटिंग और मैनेजमेंट. हर गली में बिकने वाली चीज को जब आधुनिक पैकेजिंग, बेहतर सर्विस और सही तकनीक के साथ जोड़ा जाता है, तो वह एक साधारण धंधे से कॉर्पोरेट बिजनेस बन जाता है. तो अगली बार जब आप किसी नुक्कड़ पर कोई आम चीज बिकती देखें, तो यह न सोचें कि यह छोटा काम है, बल्कि यह सोचें कि इसे बड़े पैमाने पर कैसे किया जा सकता है.
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