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अमेरिकी सीनेट से पास हुआ बिल अगर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी पारित हो जाता है तो डोनाल्ड ट्रंप के पास भारत और चीन जैसे देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की ताकत आ जाएगी.
अमेरिका की सीनेट ने एक बिल को मंजूरी दी है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन समेत रूसी तेल या नैचुरल गैस खरीदने वाले दुनिया के टॉप पांच देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की इजाजत मिल जाएगी. यह बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के सम्मान में लाया गया था. लिंडसे ग्राहम यूक्रेन के पक्के समर्थक थे और उनका 11 जुलाई को निधन हो गया था.
यह कानून उन देशों को भी निशाना बनाता है जो रूस को ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद कर रहे हैं. अब यह बिल हाउस में जाएगा. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की मुहर के साथ ही ये कानून का रूप ले लेगा. क्या भारत को इससे डरने की जरूरत है और भारत इसका तोड़ कैसे निकाल सकता है? इस सवाल का जवाब अर्थशास्त्री एसपी शर्मा ने दिया है.
ANI से बात करते हुए अर्थशास्त्री एसपी शर्मा ने कहा कि अगर अमेरिका उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है जो रूस से कच्चा तेल खरीदते हैं, तो भारत के पास दूसरे देशों में अपना एक्सपोर्ट बढ़ाने का काफी मौका है. भी जो सामान अमेरिका को भेजा जाता है, उसके लिए 15 अन्य देशों में 200 अरब डॉलर का मार्केट मौजूद है.
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका को होने वाला सामान का एक्सपोर्ट लगभग 87-88 अरब डॉलर का है, तो हमारे पास उन्हीं उत्पादों के लिए 15 अन्य देशों में 200 अरब डॉलर का बड़ा मार्केट मौजूद है. एसपी शर्मा ने नीदरलैंड, फ्रांस, यूके, लैटिन अमेरिका के देशों, सऊदी अरब, यूएई और नेपाल जैसे मार्केट का जिक्र किया.
शर्मा ने बताया कि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और दूसरी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, 2025-26 में अमेरिका को भारत का एक्सपोर्ट 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि 2024-25 में यह 86.5 अरब डॉलर था. उन्होंने कहा कि हमारे एक्सपोर्टर मजबूती दिखाने और अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाने में कामयाब रहे क्योंकि अमेरिका में भारतीय उत्पादों की बहुत मांग है. हम कॉम्पिटिटिव हैं और हम अमेरिका को लेबर-इंटेंसिव उत्पाद उपलब्ध करा रहे हैं.
अर्थशास्त्री एसपी शर्मा ने कहा कि 100 प्रतिशत तक के टैरिफ से किसी भी अर्थव्यवस्था को फ़ायदा नहीं होगा और इससे अमेरिकी ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ सकती हैं. अमेरिका के लिए भारत एक कॉम्पिटिटिव और कम लागत वाला सप्लायर है. उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों पर ज़्यादा टैरिफ से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कीमतों का दबाव बढ़ सकता है.
उन्होंने आगे कहा कि कुछ दूसरे बाजारों में एक्सपोर्ट अमेरिका को होने वाले शिपमेंट की तुलना में तेज़ी से बढ़ रहा है. अगर अमेरिका के साथ निर्यात के मामले में हमारी ग्रोथ 10-15 प्रतिशत है, तो दूसरे बाज़ारों के साथ हमारे एक्सपोर्ट की ग्रोथ रेट 20-25 प्रतिशत के बीच है. हमारे पास दूसरे विकल्प हैं और हम अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर उतने निर्भर नहीं हैं.