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ट्रक ड्राइवरों से बात करके मिला स्टार्टअप का आइडिया, फिर खड़ी कर दी अरबों की कंपनी

महज 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने वाली हर्षिता ने रूढ़िवादी सोच को पीछे छोड़ते हुए आज अमेरिका की सिलिकॉन वैली में सफलता का नया इतिहास रच दिया है.

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ट्रक ड्राइवरों से बात करके मिला स्टार्टअप का आइडिया, फिर खड़ी कर दी अरबों की कंपनी

हर्षिता अरोड़ा की कहानी (Image Source- Social Media)

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उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा शहर सहारनपुर, जहां ज्यादातर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पारंपरिक पढ़ाई करके डॉक्टर या इंजीनियर बने. इसी शहर की रहने वाली हर्षिता अरोड़ा ने महज 13 साल की उम्र में कोडिंग की पहली लाइन लिखी थी. लेकिन इसके ठीक दो साल बाद यानी 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको हैरान कर दिया. उन्होंने स्कूल छोड़ दिया. 

कौन हैं हर्षिता अरोड़ा?

माता-पिता चिंतित थे, टीचर्स परेशान थे, लेकिन हर्षिता के दिमाग में तस्वीर साफ थी; उन्हें किताबों से रटने के बजाय असल जिंदगी में चीजें बनानी थीं. बिना किसी क्लासरूम और टीचर के, हर्षिता ने सिर्फ एक कंप्यूटर और इंटरनेट के दम पर खुद को ट्रेन किया. 16 साल की उम्र में उन्होंने एक क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकिंग ऐप बनाया. यह ऐप इतना शानदार था कि एप्पल ने इसे अपने स्टोर पर फीचर किया और यह अमेरिका और कनाडा में दूसरा सबसे लोकप्रिय फाइनेंस ऐप बन गया. बाद में एक कंपनी ने इसे खरीद भी लिया.  

भारत सरकार ने किया था सम्मानित

असाधारण प्रतिभा को किसी डिग्री की जरूरत नहीं होती. हर्षिता ने इसे साबित किया. साल 2020 में भारत सरकार ने उनकी इस कामयाबी को सराहा और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया. इसी साल उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित O-1 वीजा (जो केवल असाधारण प्रतिभा वाले लोगों को मिलता है) के लिए अप्लाई किया. इसके लिए उन्हें 10 कंपनियों के सीईओ के रिकमेंडेशन लेटर्स की जरूरत थी, लेकिन उनकी काबिलियत देखकर 15 सीईओ ने उनके नाम की सिफारिश कर दी. 

कोरोना महामारी ने बिगाड़ा खेल

इसके बाद शुरू हुआ सिलिकॉन वैली का सफर. मनीकंट्रोल के अनुसार, साल 2019 में हर्षिता ने विग्नान वेलिवेला और तुषार मिश्रा के साथ मिलकर 'AtoB' नाम का एक स्टार्टअप शुरू किया. उनके आइडिया में दम था, इसलिए उन्हें दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप एक्सेलेरेटर Y Combinator से फंडिंग भी मिल गई. सब कुछ सही चल रहा था, तभी दुनिया में कोरोना महामारी ने दस्तक दी. 

ट्रक ड्राइवरों से मिला आइडिया!

महामारी के कारण उनका ओरिजिनल बिजनेस आइडिया लॉन्च होने से पहले ही फेल हो गया. महीनों की मेहनत बेकार हो चुकी थी. ऐसे समय में जहां ज्यादातर लोग हिम्मत हार जाते हैं, हर्षिता और उनकी टीम ने एक अनोखा रास्ता चुना. वे ट्रकों के रुकने वाली जगहों पर गए और हफ्तों तक ट्रक ड्राइवरों से बात की. उन्हें ट्रकिंग इंडस्ट्री या पेमेंट सिस्टम का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उन्होंने ड्राइवरों की दिक्कतों को समझा. 

कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 800 मिलियन डॉलर

यहीं से 'AtoB' का नया जन्म हुआ. उन्होंने अमेरिकी ट्रकिंग इंडस्ट्री के लिए वित्तीय ढांचा तैयार किया, जैसे फ्लीट कार्ड्स और इंस्टेंट पेमेंट्स. जो इंडस्ट्री दशकों पुराने तरीकों से चल रही थी, उसे उन्होंने डिजिटल बना दिया. आज अमेरिका में 30,000 से ज्यादा फ्लीट इसका इस्तेमाल करते हैं और इस कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 800 मिलियन डॉलर (करीब 7,600 करोड़ रुपये) हो चुकी है.

ग्लोबल टेक इंडस्ट्री और वेंचर कैपिटल के ताजा अपडेट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में हर्षिता अरोड़ा को 'Y Combinator' का जनरल पार्टनर बना दिया गया है. इससे पहले वह वहां की सबसे कम उम्र की विजिटिंग पार्टनर थीं. आज सहारनपुर की यह बेटी सिलिकॉन वैली में बैठकर यह तय करती है कि दुनिया के किस नए स्टार्टअप को फंडिंग मिलेगी. उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके पास सही विजन और बाउंस बैक करने का जज़्बा हो, तो कोई भी रुकावट आपको ग्लोबल लीडर बनने से नहीं रोक सकती.

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