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GST Collection: जीएसटी से भरा सरकारी खजाना, कलेक्शन 2 लाख करोड़ के पार, मई में 16% का उछाल

नेट जीएसटी रेवेन्यू भी 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 1.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी कलेक्शन में इतनी भारी बढ़ोतरी देखी गई.

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GST Collection: जीएसटी से भरा सरकारी खजाना, कलेक्शन 2 लाख करोड़ के पार, मई में 16% का उछाल

GST Collection February 2024

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देश का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन मई 2025 में 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मई 2024 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, यह लगातार दूसरा महीना है, जब जीएसटी राजस्व 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और उपभोग में स्थिर वृद्धि देखी जा रही है.

अप्रैल 2025 में जीएसटी कलेक्शन रिकॉर्ड तोड़ 2.37 लाख करोड़ रुपये के पहुंच गया था, जो मार्च की तुलना में 13 प्रतिशत की बढ़त थी. उस दौरान वित्त वर्ष की समाप्ति और समायोजन कारण थे, लेकिन मई में आए मजबूत आंकड़े यह दर्शाते हैं कि यह वृद्धि मौसमी नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती की ओर इशारा कर रही है.

नेट जीएसटी रेवेन्यू (रिफंड के बाद की राशि) भी 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के साथ 1.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. देश के भीतर से जीएसटी संग्रहण में 13 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि आयात पर आधारित राजस्व में 25.7 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई.

6.5% की विकास दर का लक्ष्य किया हासिल
वित्त मंत्रालय के अनुसार, भारत की समग्र अर्थव्यवस्था भी स्थिर गति से आगे बढ़ रही है. 30 मई को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए निर्धारित 6.5% की विकास दर का लक्ष्य हासिल कर लिया है. जनवरी से मार्च तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.4 प्रतिशत की दर से विस्तार किया, जो पहले की मंदी से एक मजबूत वापसी को दर्शाता है.

उपभोग में भी सुधार देखा गया है, जो देश की वृद्धि का एक प्रमुख आधार है. वित्त वर्ष 2023-24 में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि के बाद इसमें फिर से तेजी आई है. अप्रैल में उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (जैसे घरेलू उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स) की बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालांकि यह मार्च में दर्ज 6.9 प्रतिशत की वृद्धि से थोड़ी कम है.

अप्रैल-मई के आंकड़ों की बात करें तो आर्थिक गतिविधियों में निरंतर सुधार हो रहा है और टैक्स कलेक्शन में मजबूती बनी हुई है. बेहतर अनुपालन और व्यापारिक गतिविधियों में विस्तार इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं.

(With IANS input)

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