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कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री ने देश के जनता से एक साल तक सोना चांदी न खरीदने की अपील की थी. इसकी वजह सरकार सोने के आयात को कम करने का प्रयास कर रही थी. सोने का ज्यादातर आयात विदेशी देशों से होता है, जो आर्थिक स्थिति पर दबाव डालता है.
भारत सोने का निर्याता करने में टॉप देशों में से एक है. हर साल 700 से 800 टन सोना इंपोर्ट किया जाता है. इसकी वजह देश का घरेलू उत्पादन डिमांड के हिसाब से काफी कम होता है. यही वजह है कि 85 से 90 प्रतिशत सोना दूसरे देशों से इंपोर्ट करना पड़ता है, जिसके चलते डॉलर में मजबूती बढ़ती है. इसी को देखते हुए सरकार ने सोने का इंपोर्ट कम करने के लिए बीते 13 मई से सोने और चांदी के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को 6 प्रतिशत से दोगुना से भी ज्यादा बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया. इसके चलते सोने का इंपोर्ट और भी ज्यादा महंगा हो गया, लेकिन डिमांड कम नहीं होने के चलते सरकार के रेवेन्यू यानी टैक्स में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली. पिछले ढाई महीने में सरकार का सोने और चांदी से कस्टम ड्यूटी कलेक्शन करीब 10328 करोड़ रुपये रहा है.
एक्सपर्ट्स की मानें तो सोने और चांदी के पीछे की वजह सोने और चांदी की बढ़ती डिमांड और कमजोर होता रुपया था. सोने और चांदी का 90 प्रतिशत इंपोर्ट दूसरे देशों से किया जाता है. इसका भुगतान डॉलर में किया जाता है. ऐसे में सोने का बढ़ते इंपोर्ट की वजह से देश का डॉलर बड़े पैमाने पर बाहर जा रहा था. इसी को रोकने के लिए देश के प्रधानमंत्री को लोगों से कुछ समय के लिए सोने चांदी न खरीदने की अपील करनी पड़ी. इसके साथ ही सोने के इंपोर्ट पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ाना पड़ा.
अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ गये. इसके साथ ही ग्लोबल सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई. इससे इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आई. ऐसे में तेल भारत की पहली प्राथमिकता है. इसी को देखते हुए गैर जरूरी चीजों में से एक सोने को कम कर विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने का काम किया.इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को भी सरकार को बचाना था. इसी को काबू करने के लिए सोने न खरीदने की अपील की गई, जिससे सोने का आयात कम करना पड़े.
देश में सोने की सबसे ज्यादा खपत दक्षिण भारत में होती है. यहां आयात किये गये कुल सोने का करीब 20 प्रतिशत खपत किया जाता है. इनमें केरल से लेकर तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश टॉप पर हैं. इसकी मुख्य वजह यहां सोने के गहने पहनने से लेकर शादी विवाह में देने का बड़ा चलन है. इसे महिलाओं का श्रृंगार माना जाता है. यही वजह है कि सोने चांदी की डिमांड शादी विवाह, धनतेरस, अक्षय तृतीया और दिवाली पर बढ़ जाती है. क्योंकि भारत में इन मौकों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है.
सरकार द्वारा संसद में जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 13 मई से लेकर 2 अगस्त 2026 यानी कुल ढाई महीने में सरकार को सोने चांदी पर कस्टम ड्यूटी के रूप में करीब 10368 करोड़ रुपये मिले हैं. यह पैसा सरकारी राजस्व को मिला है. इसमें सोना से कस्टम ड्यूटी पर करीब 10040 करोड़, चांदी पर 328, प्लैटिनम पर 95 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, ऐसे में कुल ढाई महीने में सरकार को 10,463 करोड़ रुपये का रेवेन्यू सोने, चांदी और प्लैटिनम से प्राप्त हुआ.