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Fact Check Income Tax New Rules: इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 247 सिर्फ सर्च और सर्वे ऑपरेशन तक ही सीमित है. बगैर बड़ी टैक्स चोरी के किसी के प्राइवेट डिजिटल स्पेस में घुसने का अधिकार नहीं है.
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि नए इनकम टैक्स कानून के तहत 1 अप्रैल, 2026 से सरकार आपके फोन, मैसेज, बैंक अकाउंट और सोशल मीडिया को जब चाहे चेक कर सकती है. उसके पास आपके फोन में झांकने का अधिकार होगा. इस खबर ने लोगों की नींद उड़ा दी है. वो इसे अपनी प्राइवेसी के लिए खतरा मान रहे हैं. लेकिन क्या यह बात सच है? सरकार ने इसको लेकर अपनी स्पष्टता रखी है.
पहले तो यह समझिए कि मामला क्या है. दरअसल, @IndianTechGuide नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट ने पोस्ट कर दावा किया कि सरकार ने आयकर अधिनियम, 2025 में टैक्स चोरी को रोकने के लिए आयकर विभाग की असीमित अधिकार दिए हैं. जिसके तहत आयकर विभाग रूटीन जांच के लिए भी आपके फोन कॉल, पर्सनल मैसेज, सोशल मीडिया और ईमेल कभी भी चेक कर सकता है. जिसकी आपको भनक तक नहीं लगेगी.
लेकिन यह दावा गुमराह करने वाला है. प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने इसका फैक्ट चेक किया तो सामने आया कि सरकार ने ऐसा कोई अधिकार आयकर विभाग को नहीं दिया है. सरकार ने ऐसी कोई पावर नहीं दी कि जिससे वो किसी के डिजिटल स्पेस में घुस सके. यह सिर्फ गुमराह करने वाली एक अफवाह है. हालांकि, लोग इसको सच इसलिए भी मान रहे हैं कि 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स के नए नियम लागू हो रहे हैं.
क्या है इनकम टैक्स की धारा 247 का मतलब?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 247 सिर्फ सर्च और सर्वे ऑपरेशन तक ही सीमित है. जब तक टैक्सपेयर के खिलाफ किसी बड़ी चोरी के सबूत नहीं मिलते, तब तक विभाग को उसके प्राइवेट डिजिटल स्पेस में घुसने का अधिकार नहीं है. यानी आयकर विभाग उसके सोशल मीडिया या फोन-मैसेज को चेक नहीं कर सकता.
A post by @IndianTechGuide claims that from April 1, 2026, the Income Tax Department will have the 'authority' to access your social media, emails, and other digital platforms to curb tax evasion.#PIBFactCheck
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) December 22, 2025
❌The claim being made in this post is #misleading! Here’s the real… pic.twitter.com/hIyPPcvALF
PIB ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट 2025 की धारा 247 को लेकर कन्फ्यूजन पैदा किया गया है. असलियत में आयकर विभाग को एकमुश्त समझौता (वसूली) करने की शक्ति प्रदान करती है. इसका इस्तेमाल केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही किया जा सकता है. इसके तहत विवादित मांग का एक हिस्सा या पूरा हिस्सा आयकर विभाग माफ कर सकता है. समझौते के लिए पैनल गठित कर सकता है. ईमेल या सोशल मीडिया का एक्सेस का अधिकार तभी है, जब उसके खिलाफ टैक्स चोरी के बड़े सबूत मिले हों.
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