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Inflation News: महंगाई की वजह से आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ गया है. इस बीच सरकार ने अरहर दाल की बड़ी खरीद की है. इससे उम्मीद की जा रही है कि महंगाई पर थोड़ी लगाम लगेगी.
महंगाई (Inflation) की तेज रफ्तार ने आम लोगों के लिए घर खर्च चलाना मुश्किल कर दिया है. खाने-पीने के चीजों के दाम में बेहिसाब वृद्धि ने रसोई का बजट बुरी तरह से बिगाड़ दिया है. केंद्र सरकार ने खाद्यान्न की महंगाई पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार 3.40 लाख टन अरहर दाल खरीद रही है, ताकि दाल की कीमतों को नियंत्रित किया जा सके. इसके लिए सरकार ने पीएसएस के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तूअर की दाल खरीदी है. इससे आम लोगों की रसोई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. कृषि मंत्रालय की ओर से यह आंकड़ा जारी किया गया है. बाजार एक्सपर्ट उम्मीद कर रहे हैं कि इससे दालों की कमी से निपटा जा सकेगा और लोगों को राहत मिलेगी. मंत्रालय ने नौ राज्यों से 13.22 लाख टन तुअर दाल खरीदने की मंजूरी दी है.
केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने 10 लाख टन तुअर (अरहर) दाल के भंडारण का लक्ष्य रखा है. अब तक केंद्र सरकार ने 3,40,000 टन तुअर दाल खरीद ली है और बचे हुए स्टॉक के लिए काम जारी है. अब तक की खरीद में सबसे कर्नाटक से 1,30,000 टन अरहर दाल की खरीद गई है. कर्नाटक में किसानों को 7,550 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी (MSP) पर 450 रुपये प्रति क्विंटल राज्य की ओर से बोनस दिया गया है. इसके अलावा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश से भी दाल की खरीदारी की गई है.
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सरकार ने 2024-25 के बजट में दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लक्ष्य पर जोर दिया था. इसके लिए 2028-29 तक हरेक राज्य में जिस अनुपात में अरहर, मसूर और उड़द की दाल उगाई जाएगी, उसी अनुपात में केंद्र सरकार की ओर से उन दालों को खरीदा जाएगा. पिछले एक दशक में दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ा है. हालांकि, इसके बाद भी भारत में घरेलू दालों की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं हो रही है और दालें आयात करनी पड़ रही हैं.
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