बिजनेस
Golden Rule of Saving Money: बचाए गए रुपये की कीमत कमाए गए रुपये से ज्यादा होती है. ये बात अक्सर बड़े बुजुर्ग कहते हैं. क्योंकि बचाया रुपया ही आडे़ वक्त में काम आता है. बिजनेसमैन अक्षत श्रीवास्तव ने पैसे बचाने का गोल्डन रूल बताया है.
Golden Rule of Saving Money: आपको पता है पैसा कमाने से भी ज्यादा मुश्किल क्या है? उन पैसों को बचाना. आप अपने आसपास नज़र घुमाएंगे तो ऐसे कई लोग आपको मिल जाएंगे जिनकी दुखती रग यही है कि वो पैसे नहीं बचा पाते. कुछ लोग कहते मिलेंगे कि पैसे बचाना एक कला है. पर सच ये है कि पैसे बचाने के लिए अनुशासन की ज़रूरत होती है. Financial Discipline के बिना न सेविंग संभव है और न ही मनी मेकिंग.
इंटरनेट पर अक्षत श्रीवास्तव का एक X पोस्ट वायरल है. अक्षत श्रीवास्तव की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक, वो फुल टाइम इनवेस्टर हैं और आसान भाषा में फाइनेंस के टर्म्स को छात्रों को समझाने वाले प्लैटफॉर्म Wisdom Hatch के फाउंडर हैं.उन्होंने पैसे बचाने का गोल्डन रूल X पर शेयर किया है. वो बताते हैं कि पहली नौकरी में उनकी सैलरी 10 हजार रुपये थी और आज के समय में वो अपनी सैलरी का 95 प्रतिशत हिस्सा बचा लेते हैं.
अक्षत श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने कभी भी अपनी चादर से बाहर पैर नहीं पसारे. न ही उन्होंने कभी कोई ऐसी चीज़ खरीदी जो वो बार-बार न खरीद सकें या जिसे अपग्रेड करना अफोर्ड न कर सकें. उन्होंने कहा कि आपको किसी चीज़ पर अतिरिक्त पैसे तभी खर्च करने चाहिए जब आप अपनी स्किल डेवलपमेंट के लिए पैसे खर्च कर रहे हों. उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी कर्ज नहीं लिया.
[1] When I started my career: my salary was 10K, I used to live with my parents; used a 2nd hand mobile phone. Ate home cooked meals (almost all the time).
— Akshat Shrivastava (@Akshat_World) June 15, 2025
I was not married/had kids, took no debt.
And, still saved 1-2K/month.
[2] Fast forward a few years: I got a good…
अक्षत ने लिखा, 'जब मैंने अपना करियर शुरू किया तब मेरी सैलरी 10 हजार रुपये थी. मैं अपने पेरेंट्स के साथ रहता था. सेकंड हैंड मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था. घर का बना खाना खाता था. मेरी शादी नहीं हुई थी, बच्चे नहीं थे, मैंने कोई कर्ज नहीं लिया था और महीने के 1-2 हजार रुपये बचा लेता था.'
'कुछ साल बाद, मुझे कॉर्पोरेट में अच्छी नौकरी मिल गई. मैं साल के 50 लाख रुपये कमाने लगा. मैंने कोई कर्ज नहीं लिया और साल के करीब 20 लाख रुपये मैं बचा लेता था. मैंने अपनी सारी सेविंग्स को ऐसी जगहों पर लगाया जहां अच्छी ग्रोथ मिल सकती थी. कुछ साल ये करने के बाद, मेरी सेविंग से ही मुझे अच्छी इनकम मिलने लगती थी.'
उन्होंने बताया कि उनके पास परिवार है, बच्चे हैं और उनकी जिम्मेदारियां पहले से ज्यादा बड़ी हैं. उन्होंने लिखा, 'मैं महंगे शहर में रहता हूं, दुनिया घूमता हूं. लेकिन मेरी बचत अब मेरी सालभर की कमाई का करीब 95 प्रतिशत है. जीवन के किसी भी स्टेज पर मेरे खर्च मेरी कमाई से ज्यादा नहीं रहे.'
यानी अगर आप भी पैसे बचाना चाहते हैं तो आपको खुद में एक अनुशासन लाना होगा. क्रेडिट कार्ड खर्चों के बोझ से तुरंत तो राहत दे देते हैं, पर लॉन्ग रन में वो आपके खर्च की आदतों पर असर डालते हैं. आपका अप्रोच कैजुअल हो सकता है.
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