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अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी सैलरी से हर महीने पीएफ (PF) कटता है, तो यह खबर आपके बड़े काम की है.
अक्सर लोग पीएफ को सिर्फ एक बचत का जरिया या फिर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसा ही मानते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पीएफ खाताधारक होने के साथ ही आपको एक बहुत बड़ा फायदा बिल्कुल मुफ्त में मिलता है. इस फायदे का नाम है- 7 लाख रुपये तक का मुफ्त जीवन बीमा.
जी हां, इसके लिए आपको अपनी जेब से एक भी रुपया प्रीमियम के तौर पर नहीं देना पड़ता. सरकार की इस खास योजना को एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी 'ईडीएलआई' (EDLI) स्कीम कहा जाता है. यह पीएफ खाता खोलने के साथ ही अपने आप चालू हो जाती है.
इस इंश्योरेंस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको कोई अलग से फॉर्म नहीं भरना पड़ता, न ही किसी तरह का मेडिकल टेस्ट करवाना होता है. निजी बीमा कंपनियों की तरह यहां आपको भारी-भरकम प्रीमियम भरने की टेंशन नहीं होती. इस योजना में लगने वाले प्रीमियम का भुगतान आपकी कंपनी या नियोक्ता द्वारा किया जाता है. आपकी टेक-होम सैलरी से इसके लिए कोई कटौती नहीं की जाती है.
अगर नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी हो जाती है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को आर्थिक सहारा देने के लिए यह रकम दी जाती है. कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके द्वारा चुने गए नॉमिनी या कानूनी वारिस को बीमा की एकमुश्त राशि मिल जाती है.
नियम के मुताबिक, इस योजना के तहत कम से कम 2.5 लाख रुपये और ज्यादा से ज्यादा 7 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है. राहत की बात यह भी है कि अगर किसी कर्मचारी ने लगातार एक साल तक नौकरी की है, तो भले ही उसने इस दौरान कंपनियां बदली हों, उसके परिवार को न्यूनतम ढाई लाख रुपये की सुरक्षा जरूर मिलती है.
इस बीमा के तहत मिलने वाली रकम इस बात पर निर्भर करती है कि कर्मचारी की मृत्यु से ठीक पहले के 12 महीनों में उसकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता कितना था. उसी हिसाब से इस राशि की गणना की जाती है और अधिकतम 7 लाख रुपये तक का भुगतान किया जाता है.
इस सरकारी योजना का लाभ आपके परिवार को बिना किसी परेशानी के मिल सके, इसके लिए आपको अपने पीएफ खाते में ई-नॉमिनेशन यानी नॉमिनी का नाम जरूर अपडेट रखना चाहिए. यदि खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं होगा, तो परिवार के लोगों को पैसा क्लेम करने के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काटने पड़ सकते हैं.
क्लेम करने के लिए नॉमिनी को डेथ सर्टिफिकेट और बैंक अकाउंट की जानकारी के साथ जरूरी फॉर्म भरकर ईपीएफओ के पास जमा करना होता है. संक्षेप में कहें तो, पीएफ सिर्फ बुढ़ापे की लाठी ही नहीं है, बल्कि आपके कामकाजी जीवन के दौरान आपके परिवार का एक मजबूत सुरक्षा कवच भी है, जिसके बारे में हर नौकरीपेशा इंसान को पता होना चाहिए.