बिजनेस
ZMCL के सीईओ रक्तिम दास ने जी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी से खास बातचीत की और FY27 में कंपनी की ग्रोथ का पूरा रोडमैप समझाया, पढ़ें उनके इंटरव्यू की खास बातें...
जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड बदलाव पर आधारित एक डेवलेपमेंट स्ट्रैटजी पर फोकस कर रहा है. इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कंटेंट और रेवेन्यू के नए सोर्स में इन्वेस्टमेंट कंपनी को अपने वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद कर रहा है. ZMCL के सीईओ रक्तिम दास ने जी बिजनेस के मैनेजिंग एडिटर अनिल सिंघवी से एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं.
कंपनी ने 30 जून, 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए 190.85 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया जो पिछले साल की इस अवधि के 182.36 करोड़ रुपये से 4.7 प्रतिशत से ज्यादा है. मैनेजमेंट के मुताबिक, परिचालन व्यय 174.59 करोड़ रुपये रहा, जिसकी वजह से EBITDA 16.26 करोड़ रुपये रहा. कंपनी ने पिछली तिमाही में 11 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा दर्ज किया था. इसका शुद्ध घाटा भी घटकर 26 करोड़ रुपये से 12 करोड़ रुपये रह गया.
इस तिमाही में एडवरटाइजमेंट रेवेन्यू का अहम स्रोत रहा. विज्ञापन से होने वाली आय में पिछले साल की तुलना में 47.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 121.66 करोड़ रुपये से बढ़कर 179.71 करोड़ रुपये हो गई. सब्सक्रिप्शन से होने वाली आय में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 10.13 करोड़ रुपये से बढ़कर 11.14 करोड़ रुपये हो गई.
सीईओ रक्तिम दास ने इस सुधार वजह टीवी प्रसारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बीच बेहतर तालमेल, कंटेंट की नई रणनीति और केवल पारंपरिक विज्ञापनों पर निर्भर न रहने की कोशिशों को बताया. उन्होंने कहा कि जी मीडिया एक 'ऑम्नीचैनल न्यूज़ ब्रांड स्ट्रैटजी की ओर बढ़ रहा है. इसके तहत कंपनी का लक्ष्य टेलीविजन, मोबाइल और दूसरे स्क्रीन पर दर्शकों को आकर्षित करना है.
उन्होंने बताया कि यह बदलाव न्यूज रूम में टेक्नोलॉजी को अपनाने से होगा. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी ने पहले ही कुछ शुरुआती कदम उठाए हैं और फ्यूचर में भी इस तरह के और बदलाव होने की उम्मीद है. सीईओ ने रेवेन्यू के दूसरे स्रोत विकसित करके विज्ञापन पर इंडस्ट्री की निर्भरता को कम करने की जरूरत पर भी बल दिया. इनमें ब्रांडेड कंटेंट, इवेंट्स, न्यू मार्केट और कंपनी के डिजिटल दर्शकों के लिए एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) पर आधारित मॉडल शामिल हो सकते हैं. उनके मुताबिक, कंपनी का डिजिटल कारोबार पिछली तिमाहियों की तुलना में कुल राजस्व में पहले से ही ज्यादा योगदान दे रहा है.
एडवरटाइजमेंट के मामले में सीईओ ने कहा कि कंपनी विज्ञापनदाताओं की व्यावसायिक दिक्कतों को समझने और उन जरूरतों के हिसाब से कंटेंट और एडवरटाइजिंग सॉल्यूशन विकसित करने पर फोकस कर रही है. उन्होंने कहा कि जी मीडिया सिर्फ पारंपरिक विज्ञापन सामग्री उपलब्ध कराने के बजाय, विज्ञापनदाताओं के लिए डिजिटल और प्रसारण अवसरों को जोड़ने करने पर विचार कर रही है.
दास ने बताया कि कंपनी सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं करेगी, बल्कि विज्ञापनदाताओं के पार्टनर की तरह काम करेगी. उन्होंने आगे कहा कि जब हम ग्राहकों की जरूरतों को सही से समझेंगे, तो उनके साथ हमारे व्यावसायिक रिश्ते ज्यादा मजबूत और लंबे समय तक बने रहेंगे.
जी मीडिया डिजिटल और टीवी प्रसारण को अलग-अलग कारोबार के तौर पर नहीं देखती, बल्कि दोनों को एक साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहती है. कंपनी का मानना है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म के हिसाब से कंटेंट का फॉर्मेट बदलकर ज्यादा दर्शकों तक पहुंचा जा सकता है. कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करीब 5 करोड़ यूजर्स हैं. अगर इनमें से सिर्फ 1 प्रतिशत यूजर्स को भी पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल से जोड़ा जाता है, तो इससे कंपनी के लिए कमाई का बड़ा अवसर बन सकता है. खासतौर पर ज़ी बिज़नेस को प्रीमियम कंटेंट और मजबूत यूजर बेस के कारण सब्सक्रिप्शन मॉडल के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
सीईओ दास ने कंपनी के विकास के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया है. इनमें जी न्यूज और जी बिजनेस जैसे बड़े ब्रांड को मजबूत करना, WION को भारत के ग्लोबल न्यूज ब्रांड के रूप में आगे बढ़ाना, क्षेत्रीय चैनलों से कमाई बढ़ाना और डिजिटल कारोबार का विस्तार करना शामिल है. जी न्यूज में भरोसेमंद और प्रासंगिक खबरों के साथ दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा. वहीं, WION की पहुंच भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ाने की योजना है. क्षेत्रीय बाजारों में टीवी और डिजिटल को साथ लाकर विज्ञापन से ज्यादा कमाई करने की कोशिश होगी.
जी मीडिया ने युवा दर्शकों को ध्यान में रखते हुए जी भारत को भी नए अंदाज में पेश किया है. कंपनी का मानना है कि युवा खबरों से दूर नहीं हो रहे हैं, बल्कि वे खबरों को पारंपरिक टीवी न्यूज चैनलों से अलग तरीके और फॉर्मेट में देखना पसंद करते हैं. इस वजह से जी भारत के करीब 30 प्रतिशत कार्यक्रम न्यूज पर आधारित हैं, जबकि 70 प्रतिशत कंटेंट युवाओं की रुचि, लाइफस्टाइल और पसंद से जुड़ा नॉन-न्यूज कंटेंट है. दास ने नए जी भारत को डिजिटल आधारित, 24x7 स्ट्रीमिंग और युवा संस्कृति पर केंद्रित न्यूज ब्रांड बताया. इस नए फॉर्मेट को लॉन्च करने से पहले करीब 10 महीनों तक यूट्यूब और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टेस्ट किया गया.
ज़ी मीडिया की नई रणनीति में AI और टेक्नोलॉजी की भी अहम भूमिका है. कंपनी का मानना है कि AI की मदद से खबरों और दूसरे प्रोडक्ट्स को तेजी से तैयार करने के साथ काम करने की क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है. हालांकि, कंपनी AI का इस्तेमाल केवल न्यूज रूम के छोटे-छोटे कामों तक सीमित नहीं रखना चाहती. उसका लक्ष्य न्यूज रूम में मौजूद जानकारी और अनुभव को एक जगह इकट्ठा करके एक तरह का 'डिजिटल ब्रेन' तैयार करना है. इससे कंपनी को बेहतर कंटेंट फैसले लेने, जरूरी जानकारी का सही इस्तेमाल करने और पूरे न्यूज ऑपरेशन को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.