बिजनेस
बचपन से मां के हाथ के बने जिस डोसा को वह चाव से खाते थे, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वही उनके वेंचर का आइडिया भी बन जाएगा. मुश्किल हालातों से हार माने बिना उन्होंने लगन के साथ अपना काम जारी रखा और आज उनकी सफलता दुनिया के सामने है...
कई बार बिजनेस आइडिया हमारी आंखों के सामने होता है लेकिन फिर भी यह हमें दिखाई नहीं देता. ठाणे के गणेश साठे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. शुरुआत में उन्हें भी समझ नहीं आया कि अपना करियर कैसे शुरू किया जाए लेकिन एक आइडिया ने उनकी जिंदगी ही बदल दी. बचपन से मां के हाथ के बने जिस डोसा को वह चाव से खाते थे, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वही उनके वेंचर का आइडिया भी बन जाएगा.
गणेश ने अपनी मां की रेसिपी को सिर्फ परिवार तक सीमित रखने की जगह इससे अपना स्टार्टअप शुरू करने की ठानी. उनका सफर किसी ताम-झाम के साथ नहीं बल्कि एक पुराने ठेले, 50 हजार रुपये और ढेर सारी अनिश्चितताओं के साथ शुरू हुआ. आज उनका वेंचर The Benne आउटलेट के नाम से मशहूर है और हर दिन सैकड़ों ग्राहक इनके डोसों का लुत्फ उठा रहे हैं.
वह चार्टेड अकाउंटेंसी की तैयारी कर रहे थे, जब उन्होंने कुछ अलग करने के लिए गंभीरता से सोचना शुरू किया. उन्हें अपनी मां के बेन्ने डोसा से प्रेरणा मिली, जो डोसा की बेहद बटरी और क्रिस्पी वेरायटी होती है. उन्हें लगा कि यह डोसा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को पसंद आएगा. धीरे-धीरे उन्होंने अपनी सीए की तैयारी छोड़ दी और 50 हजार रुपयों के साथ अपने आइडिया को जमीन पर उतारने के सफर पर चल पड़े. इन रुपयों से गणेश और उनकी बहन सपना ने एक पुराने ठेले को एक छोटा डोसा स्टॉल बना दिया.
लेकिन यह सफर इतना भी आसान नहीं था. उन्हें और उनकी बहन को फूड ट्रक और दूसरे मशहूर स्ट्रीट फूड्स से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी. उनके ग्राहकों की संख्या बेहद कम थी. एक समय ऐसा भी आया, जब इस डोसा कार्ट से प्रतिदिन वह सिर्फ 200 रुपये ही निकाल पा रहे थे और उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था. परिस्थितियां इतनी खराब हो चली थीं कि अब कार्ट को बंद करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं दिखाई दे रहा था.
लेकिन हार मानने के बजाय गणेश और सपना ने अपने बिजनेस को सक्सेसफुल बनाने के लिए नया तरीका ढूंढ निकाला. उन्होंने अपने कार्ट को फिर से तैयार किया, अपने डोसा पर फोकस किया और अपने सफर को सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया. उनके बिहाइंड-द-सीन ने लोगों को उनके इस फैमिली बिजनेस की झलक दिखाई. गणेश की मां और सपना डोसे के ताजा बैटर बनाते थे जबकि गणेश डोसा बनाने में मग्न रहता था. धीरे-धीरे उनकी ऑनलाइन उपस्थिति से लोग उनके इस बिजनेस की ओर आकर्षित होने लगे. ग्राहकों की संख्या भी बढ़ने लगी.
उनके इंस्टाग्राम अकाउंट के मुताबिक, अब यह आउटलेट हर दिन करीब 400 से ज्यादा कस्टमर्स को सर्व करता है. कभी-कभी तो एक घंटे के अंदर ही सारे डोसा बिक जाते हैं. उनका बिजनेस कथित तौर पर हर दिन 40,000 रुपये कमा रहा है. इस तरह से गणेश अपने इस बिजनेस से हर महीने करीब 12 लाख रुपये तक मुनाफा निकाल ले रहे हैं.
गणेश और सपना की सफलता की कहानी यह सिखाती है कि शुरुआत कितनी भी साधारण क्यों न हो लेकिन अगर आप उसमें लगे रहे तो एक न एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी. इस परिवार के पास कोई चमकता-दमकता बिजनेस प्लान नहीं था और उन्होंने बड़े स्तर पर कोई लॉन्चिंग का प्रोग्राम भी नहीं बनाया था. परिवार की एक रेसिपी, छोटा सा इंवेस्टमेंट और परिस्थितियां विपरीत होने पर भी अपने काम में तल्लीनता से लगे रहने ने ही उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया. उनका सफर दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया की मदद से कोई छोटा सा बिजनेस ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बना सकता है.