बिजनेस
आज हम एक ऐसी ही शख्स की कहानी लेकर आए हैं, जो एक ऑटो रिक्शा चलाता था. लेकिन अपना ऑटो बेचकर उसने कारोबार किया है और आज करोड़ों का साम्राज्य बना दिया है.
ऐसा जरूरी नहीं है कि बिजनेस के लिए लाखों-करोड़ों रुपय की जरूरत होती है या बड़े पैमाने पर ही कारोबार शुरू करना चाहिए. ये सोच लोगों को कभी भी आगे नहीं बढ़ने देती है. आप बिजनेस छोटे पैमाने पर और कम पैसों में भी शुरू कर सकते हैं. बस आपके अंदर हौसला होना चाहिए. आज हम एक ऐसी ही शख्स की कहानी लेकर आए हैं, जो एक ऑटो रिक्शा चलाता था. लेकिन अपना ऑटो बेचकर उसने कारोबार किया है और आज करोड़ों का साम्राज्य बना दिया है. आज वो शख्स दो करोड़ों की कंपनियों का मालिक हैं. इस कहानी से आप भी सीख और प्रेरणा ले सकते हैं.
कर्ज लेकर लिया था ऑटो रिक्शा
कर्नाटक के बेल्लारे गांव के रहने वाले सत्य शंकर ने 18 साल की उम्र में अपनी 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी थी. क्योंकि उनके पिता गांव में एक पुजारी थी और वो अपने बेटे को आगे नहीं पढ़ा पा रहे थे. इस वजह से उनके पिता ने लोन लेकर अपने बेटे को ऑटो रिक्शा दिलाया. उन्होंने ऑटो चलाया और अपना कर्जा चुकाया. हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने अपनी ऑटो बेच दी और एंबेसडर कार खरीद ली. टैक्सी ड्राइवर के तौर पर उ्होंने देखा कि विदेशी पर्यटक कहीं से भी आए हों. वो सील पैक पानी की बोतल खरीदते हैं. इस आइडिया को उन्होंने अपने सीने में दफ्त कर लिया.
ड्राइवरी छोड़कर शुरू किया ये काम
साल 1988 में शंकर ने अपनी कार भी बेच दी और स्पेयर पार्ट्स का बिजनेस किया. उन्होंने पुत्तूर में ऑटोमोबाइल की एक छोटी दुकान खोली. हालांकि, उन्होंने देखा कि ग्राहक पार्ट लेता है, तो उसे टायर में भी चाहिए होता है. इसी वजह से उन्होंने टायर की भी दुकान कर ली. हालांकि, इससे उन्होंने देखा कि किसान और स्थानीय लोग उधार समान लेते और किस्तों में पैसा देते. हालांकि, उन्हें आइडिया आया कि ये लोग बैंक को भी पैसा दे सकते हैं.
साल 1994 में उन्होंने प्रावीण कैपिटल नाम से एक फाइनेंस कंपनी शुरू कर दी. हालांकि, इस कंपनी के चलते शंकर ने ग्राहकों को पुराने ऑटो और कार के लिए लोन देना शुरू कर दिया. उन्होंने खुद ड्राइवरी की हुई है, जिसकी वजह से वो उस संघर्ष को अच्छी तरह समझते हैं. शंकर का ये बिजनेस हिट हो गया और उनकी फाइनेंस कंपनी प्रावीण कैपिटल चल पड़ा.
फिर शुरू किया दूसरा बिजनेस
प्रावीण कैपिटल हिट होने के बाद शंकर रुके नहीं. उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष के दौरान पानी के बिजनेस का आइडिया दिमाग में सोचे रखा था. इसी वजह से उन्होंने साल 2000 में नारिमोगेरू में एक फैक्ट्री लगाई और बिंदु नाम से कंपनी की नींव रखी. हालांकि, एक बार वो सोड़ा पीने गए, उन्हें उसका स्वाद अच्छा नहीं आया और उन्होंने दोस्तो से कहा कि मैं इससे अच्छा स्वाद बना सकता हूं. फिर उन्होंने बिंदु फिज जीरा मसाला बनाया.
शंकर मार्केट में अपनी कंपनी के 200 बॉक्स भेजते थे, जिसमें से 100 बॉक्स वापस आ जाते थे. पेप्सी और कोक जैसी कंपनियों का टक्कर देना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. हालांकि, देखते ही देखते बिंदु फिज हिट हो गया और इसने लोगों को अपना दीवाना बना दिया.
आज बना दिया करोड़ों का साम्राज्य
सत्य शंकर का बचपन से लेकर जवानी तक सभी संघर्ष में गुजरा है. लेकिन उन्होंने अंदर कुछ बड़ा करने की ललक थी और कभी हार न मानने वाला हौसला था. आज SG कॉर्पोरेट्स का सालाना टर्नओवर 900 करोड़ रुपये पहुंच गया है. प्रवीण कैपिटल की कमाई 330 करोड़ है, जबकि बिंदु कंपनी की कमाई 570 करोड़ रुपये है. बिंदु कंपनी आज जीरा मसाला से लेकर मैंगो जूस और स्नैक्स समेत 55 अलग-अलग प्रोडक्ट बेचती है.
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