बिजनेस
Business Success Story: आज हम एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहा है, जिसने 50-50 रुपये जोड़कर बिजनेस शुरू किया था. इतना ही नहीं, कारोबार करने से पहले उन्होंने किराना दुकान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयरिंग तक काम भी किया है.
लोग सोचते हैं कि बिजनेस के लिए काफी ज्यादा पैसा होना चाहिए. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. बिजनेस के लिए आपके अंदर आगे बढ़ने की ललक, हौसला और कभी न हार मानने की सोच होनी चाहिए. आज हम एक ऐसे शख्स की कहानी बताने जा रहा है, जिसने 50-50 रुपये जोड़कर बिजनेस शुरू किया था. इतना ही नहीं, कारोबार करने से पहले उन्होंने किराना दुकान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयरिंग तक काम भी किया है. लेकिन आज उन्होंने करोड़ों का साम्राज्य बना दिया है और कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. आप भी इस कहानी से सीख ले सकते हैं.
किराना दुकान से इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयरिंग तक
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के सपनावत गांव के रहने वाले राजीव कुमार गुप्ता ने 5वीं क्लास से ही पढ़ाई के साथ-साथ किराना दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था. उनके बेटे तनुज गुप्ता ने लोकल 18 को बताया कि राजीव गुप्ता दुकान पर काम करते थे और रोज 50-50 रुपये भी जोड़ते थे. लेकिन कुछ समय बाद वो शहर आ गए और वहां उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स का काम सीखना शुरू किया. उन्होंने खुद ही कूलर असेंबल किए और खुद दी सर्विस भी की. हालांकि, उन्होंने इरादा कर लिया था कि वो इसी फील्ड में आगे कारोबार करेंगे.
25 हजार से की थी बिजनेस की शुरुआत
तनुज ने बताया कि साल 1992 में राजीव गुप्ता 25000 रुपये से अपना कारोबार स्टार्ट किया. उन्होंने थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड कंपनी की शुरुआत की. उसके बाद साल 2006 में कंपनी को रजिस्टर भी करवा लिया था. इस कंपनी में कूलर, वॉशिंग मशीन और पंखे समेत कई इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट मिलते हैं. अब उनकी कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स की फील्ड पर काम कर रही है और साथ ही पूरे भारत में सप्लाई पर फोकस कर रही है.
हालांकि, तनुज ने ये भी बताया है कि जब उनके पिता किराना दुकान पर काम करते थे, तो रोजाना 50-50 रुपये बिजनेस केलिए जोड़ते थे. राजीन गुप्ता के लिए सफलता बिल्कुल भी आसान नहीं रही है. राजीव के बाद उनके बेटे तनुज गुप्ता और तुषार गुप्ता कंपनी के निदेशक हैं.
आज बनाया करोड़ों का साम्राज्य
रिपोर्ट्स के अनुसार, थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड कंपनी का सालाना टर्नओवर 300 करोड़ रुपये है. राजीव के साथ अब उनके बेटे कंपनी को संभाल रहे हैं और वो अब पूरे भारत में अपने कंपनी पहुंचाना चाहते हैं. राजीव की इस कहानी से काफी कुछ सीखने को मिलता है. उन्होंने दुनिया को बताया है कि करोड़ों की कंपनी बनाने के लिए सिर्फ ज्यादा पैसा मायने नहीं रखता है, बल्कि हौसला सबसे ज्यादा जरूरी है.