बिजनेस
Business Success Story: आज हम एक ऐसे शख्स की कहानी बताने वाले है, जिसने विदेशों में नौकरी की और अच्छी सैलरी भी मिलती थी. लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि नौकरी से गुजारा नहीं होगा और उन्हें अपना बिजनेस करना चाहिए.
अक्सर लोग पढ़ाई-लिखाई के बाद तुरंत नौकरी की तलाश शुरू कर देते है, जबकि कई लोग ऐसे हैं, जिन्हें अच्छे पैकेज पर जॉब मिल भी जाती है. लेकिन आज हम एक ऐसे शख्स की कहानी बताने वाले है, जिसने विदेशों में नौकरी की और अच्छी सैलरी भी मिलती थी. लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि नौकरी से गुजारा नहीं होगा और उन्हें अपना बिजनेस करना चाहिए. इसी वजह से उन्होंने कारोबार किया और आज करोड़ों का साम्राज्य बना दिया है. इतना ही नहीं, आज उनका बिजनेस 6 बड़े शहरों में फैला हुआ है.
नौकरी छोड़ 13 लाख में शुरू किया बिजनेस
बिहार के जमालपुर के रहने वाले अभिजीत आनंद ने IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया हुआ है. हालांकि, पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक मल्टीनेशनल कंपनी में 8.5 साल तक अलग-अलग देशों में काम किया है. लेकिन एक बार जब वो रोमानिया गए, तो वहां उन्हें कॉफी पीने की आदत लग गई. हालांकि, एक कॉफी के लिए उन्हें 200-300 रुपये खर्च करने पड़ते थे. हालांकि, फिर अभिजीत ने भारत के 12 राज्यों के 20 शहरों में खुद कार चलाकर सफर किया और उसकी बारीकियां सीखीं.
हालांकि, अभिजीत ने काफी रिसर्च की और फिर अपनी जमा पूंजी के 13 लाख रुपये कारोबार में लगा दिए. उन्होंने साल 2022 में मुंबई के वर्सोवा में पहला स्टार्टअप शुरू किया. अभिजीत ने अबकॉफी (abcoffee) नाम से अपना पहला आउटलेट खोला. हालांकि, उनके लिए शुरुआत आसान नहीं रही और उन्हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
6 बड़े शहरों में फैला कारोबार
अभिजीत के सामने भले ही चुनौतियों का सामना करना पड़ा हो. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा आगे बढ़ते रहे. आज उनका कारोबार 6 बड़े शहरों में फैला हुआ है. दिल्ली एनसीआर में करीब 38 आउटलेट और मुंबई में 50 आउटलेट खुल चुके हैं. हालांकि, इन सभी आउटलेट से हर महीने 3 लाख से ज्यादा कप कॉफी बिकती है.
आज बनाया करोड़ों का साम्राज्य
अभिजीत आनंद ने अच्छे पैकेज वाली नौकरी छोड़कर कारोबार का रिस्क लिया था और आज वो रिस्क उन्हें बहुत काम आया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिजीत की कंपनी अबकॉफी का सालाना रेवेन्यू 75 करोड़ रुपये पहुंच गया है और 2027 तक इसे 100 करोड़ पहुंचाने का टारगेट भी है.