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Budget 2025: वो पांच बड़े मुद्दे, जिन पर आम आदमी को निर्मला सीतारमण से है राहत और बड़े ऐलान की आस

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अपना आठवां आम बजट पेश करने जा रही हैं. महंगाई लगातार लोगों की जेब पर असर डाल रही है और बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है. आम लोग और विशेषज्ञ इस बजट से कुछ राहत की उम्मीद कर रहे हैं.

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Budget 2025: वो पांच बड़े मुद्दे, जिन पर आम आदमी को निर्मला सीतारमण से है राहत और बड़े ऐलान की आस

Budget 2025

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1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman)देश का आम बजट (Union Budget) पेश करेंगी. यह बजट एक ऐसे समय में आ रहा है जब महंगाई बढ़ रही है. नौकरियों की संख्या घट रही है और अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है. इन हालात में आम जनता को इस बजट से राहत की उम्मीद है. सरकार के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि क्या वह महंगाई को काबू कर पाएगी, रोजगार के अवसर बढ़ा पाएगी और मध्यम वर्ग को करों में कुछ राहत दे पाएगी? बजट 2025 में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा ध्यान रहेगा, आइए जानते हैं.

1. महंगाई: हर घर की सबसे बड़ी चिंता
पिछले कुछ महीनों में घरेलू खर्च लगातार बढ़ा है. खासकर सब्जियां, खाद्य तेल और दूध जैसी जरूरी चीजें महंगी हुई हैं. मौसम में बदलाव और आपूर्ति में रुकावट के कारण सब्जियों के दाम बढ़ गए, जबकि खाद्य तेल की कीमतें आयात शुल्क में वृद्धि की वजह से बढ़ी हैं. हालांकि, अमूल जैसी कुछ कंपनियों ने हाल ही में दूध की कीमतों में मामूली कटौती की है, लेकिन यह राहत बहुत कम है. सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह इस बजट में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएगी.

2. आर्थिक सुस्ती: ग्रोथ रेट पर संकट
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2024-25 में देश की विकास दर 6.4% रहने की संभावना है, जो कि पिछले कुछ सालों में सबसे कम है. चुनावी वर्ष में बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च में कटौती इसका एक कारण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाए तो इससे स्टील, सीमेंट और मशीनरी उद्योगों में तेजी आएगी, जिससे नए रोजगार भी पैदा होंगे. इस बजट से उम्मीद है कि सरकार पूंजीगत खर्च (capital expenditure) को बढ़ाकर विकास दर को गति देने की कोशिश करेगी.

3. रोजगार के अवसर: युवा वर्ग की उम्मीदें
बेरोजगारी आज के समय की एक गंभीर समस्या बन चुकी है. कोविड-19 के दौरान गांवों की ओर लौटे कई मजदूर अब भी वापस नहीं आए हैं क्योंकि शहरों में नौकरी के अवसर कम हैं और रहने का खर्चा लगातार बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़े संगठित क्षेत्र में रोजगार सुधार का संकेत दे रहे हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र अब भी संघर्ष कर रहा है. छोटे और मध्यम उद्योगों को सरकार से आर्थिक सहायता की जरूरत है ताकि वे अधिक नौकरियां दे सकें.

4. इनकम टैक्स: मध्य वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद
आम आदमी पर करों का बोझ बढ़ रहा है. हालांकि, जीएसटी दरों में बदलाव का फैसला बजट के बाहर किया जाता है, लेकिन इनकम टैक्स पर सरकार बड़ा ऐलान कर सकती है.कई नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने मांग की है कि इनकम टैक्स छूट की सीमा 10 लाख रुपये तक बढ़ाई जाए. यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है.

5. वेतन वृद्धि की धीमी रफ्तार
महंगाई बढ़ रही है, लेकिन मजदूरी और वेतन उसी गति से नहीं बढ़ रहे. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि दिहाड़ी मजदूरों की आय में पिछले एक साल में मात्र 3.4% की बढ़ोतरी हुई, जबकि वेतनभोगी कर्मचारियों के वेतन में औसतन 6.5% की वृद्धि हुई. ब्रिटानिया, फिक्की जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि 2019 से 2023 के बीच एफएमसीजी सेक्टर में वेतन में 5.4% वृद्धि देखी गई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वेतन वृद्धि मात्र 0.8% रही. सरकार के लिए यह एक अहम मुद्दा होगा कि वह आम जनता की आय में सुधार के लिए क्या कदम उठाती है.


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राहत मिलेगी या नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?
बहरहाल, बजट 2025 से हर वर्ग को कुछ न कुछ उम्मीदें हैं, चाहे वह महंगाई से राहत चाहता हो, रोजगार की तलाश में हो या अपनी आयकर देनदारी कम करना चाहता हो. सरकार के लिए यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि आम आदमी के जीवन पर सीधा असर डालने वाला फैसला होगा. अब देखना यह है कि निर्मला सीतारमण के बजट से जनता को राहत मिलेगी या नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

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