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8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनभोगियों में भी पेंशन बढ़ोतरी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है.
केंद्रीय कर्मचारियों की तरह ही रिटायर हो चुके पेंशनभोगियों की नजरें भी आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं. नया वेतन आयोग न सिर्फ सेवारत कर्मचारियों की सैलरी में सुधार करेगा, बल्कि पेंशनर्स की मासिक पेंशन को भी नए सिरे से तय करेगा. इसी को लेकर अब पेंशनभोगी संगठनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखनी शुरू कर दी हैं.
भारत पेंशनर्स समाज ने मांग की है कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 45,000 रुपये प्रति माह किया जाए. इसके अलावा, महंगाई राहत में हर तीन महीने में बदलाव करने और DR के 25% पार होते ही उसे मूल पेंशन में मिलाने का सुझाव भी दिया गया है. अगर मौजूदा व्यवस्था की बात करें, तो सातवें वेतन आयोग के तहत अभी केंद्रीय पेंशनभोगियों को कम से कम 9,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम बेसिक पेंशन मिलती है.
आठवें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था और इसे अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है. इसका मतलब है कि आयोग को 3 मई 2027 तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी होंगी. आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही केंद्र सरकार इस पर अंतिम फैसला लेगी और नई दरों को लागू किया जाएगा.
पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह काफी हद तक फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा. कर्मचारी संगठनों और नेशनल काउंसिल-JCM की ओर से 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की जोरदार मांग की जा रही है. अगर सरकार इस 3.83 के आंकड़े को मान लेती है, तो पेंशन में तीन गुने से भी ज्यादा का उछाल देखने को मिल सकता है.
आसान शब्दों में समझें तो, नए फिटमेंट फैक्टर से पेंशन तय करने का फॉर्मूला यह होगा- मौजूदा बेसिक पेंशन × 3.83 = नई अनुमानित बेसिक पेंशन.
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी पेंशनभोगी की मौजूदा बेसिक पेंशन 20,000 रुपये है, तो 3.83 के गुणांक से उनकी नई बेसिक पेंशन सीधे 76,600 रुपये तक पहुंच सकती है. इसी तरह, अगर किसी की बेसिक पेंशन 10,000 रुपये है, तो वह 38,300 रुपये हो जाएगी. वहीं, 30,000 रुपये पेंशन पाने वालों का आंकड़ा 1,14,900 रुपये और 50,000 रुपये वालों का आंकड़ा 1,91,500 रुपये तक जा सकता है.
हालांकि, यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि 3.83 फिटमेंट फैक्टर महज कर्मचारी यूनियनों की एक मांग है. वेतन आयोग ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है. 7वें वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर किया था, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 7,000 से बढ़कर 18,000 रुपये हुई थी.
अक्सर लोग नए फिटमेंट फैक्टर से मिलने वाली रकम में मौजूदा महंगाई राहत (DR) को भी जोड़ लेते हैं, जो कि गलत तरीका है. महंगाई राहत असल में बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए दी जाती है. जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तो पुरानी DR को बेसिक पेंशन में समाहित कर दिया जाता है. इसलिए अंतिम पेंशन राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार बेसिक पेंशन और DR का पुनर्गठन किस तरह करती है.
सोशल मीडिया और खबरों में जिस 69,000 रुपये की चर्चा चल रही है, वह कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन की मांग है, न कि न्यूनतम पेंशन की. आठवें वेतन आयोग के तहत अभी तक कोई भी न्यूनतम पेंशन तय नहीं हुई है.
पेंशनर्स एसोसिएशन ने 45,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन की मांग जरूर रखी है, लेकिन सरकार की मंजूरी के बिना इसे तय नहीं माना जा सकता. सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि 3 मई 2027 तक आयोग अपनी क्या सिफारिशें पेश करता है और सरकार उनमें से किन प्रस्तावों को स्वीकार करती है.
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