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जब भी ग्लोबल मार्केट में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ एक आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है.
जब भी समाचारों में ये खबर आती है कि "डॉलर के मुकाबले रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरा," तो बहुत से लोग इसे सिर्फ शेयर बाजार या बड़े कारोबारियों से जुड़ी खबर मानकर छोड़ देते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि रुपये की सेहत का सीधा असर आपकी और हमारी रसोई, बच्चों की पढ़ाई और जेब पर पड़ता है. जानिए कि जब रुपया कमजोर होता है, तो एक आम भारतीय की जिंदगी में क्या-क्या बदल जाता है.
इसे ऐसे समझिए कि दुनिया के बाजार में डॉलर एक ऐसी करेंसी है जिससे ज्यादातर व्यापार होता है. अगर डॉलर की मांग बढ़ जाए या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ें, तो रुपये की वैल्यू कम होने लगती है. जब हमें 1 डॉलर खरीदने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं, तो हम कहते हैं कि रुपया कमजोर हो गया है.
भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. इसका भुगतान डॉलर में होता है. अब अगर रुपया कमजोर होगा, तो तेल कंपनियों को तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने होंगे. जब तेल महंगा होगा, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और हम जानते हैं कि डीजल महंगा होने का मतलब है, माल ढुलाई महंगी होना. इससे सब्जी, फल और अनाज से लेकर हर छोटी-बड़ी चीज की कीमतें बढ़ जाती हैं.
क्या आप नया आईफोन, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी खरीदने की सोच रहे हैं? रुपये की गिरावट आपकी इस योजना पर पानी फेर सकती है. मोबाइल फोन और कंप्यूटर के ज्यादातर पार्ट्स विदेशों, खासकर चीन और ताइवान से आते हैं. रुपया गिरने से इन सामानों की लागत बढ़ जाती है, जिससे कंपनियां ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ा देती हैं.
मिडिल क्लास परिवारों के लिए अपने बच्चों को विदेश भेजना एक बड़ा सपना होता है. लेकिन अगर रुपया गिरता है, तो कॉलेज की फीस और रहने का खर्च अचानक बढ़ जाता है. मान लीजिए किसी यूनिवर्सिटी की फीस $50,000 है. अगर डॉलर ₹80 से बढ़कर ₹85 हो जाए, तो सीधे तौर पर ₹2.5 लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है. यही बात विदेश यात्रा पर भी लागू होती है. आपकी फ्लाइट से लेकर होटल तक सब कुछ महंगा हो जाता है.
जब रुपया बहुत ज्यादा गिरता है और महंगाई बढ़ती है, तो इसे कंट्रोल करने के लिए रिजर्व बैंक अक्सर ब्याज दरें बढ़ा देता है. इसका नतीजा यह होता है कि आपके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई बढ़ जाती है यानी आपकी बचत का एक बड़ा हिस्सा बैंक की किस्तों में जाने लगता है.
कुल मिलाकर, एक आम भारतीय उपभोक्ता के लिए रुपये का कमजोर होना महंगाई का निमंत्रण है. खाने-पीने की चीजों से लेकर लग्जरी आइटम्स तक, हर चीज की कीमत इस पर निर्भर करती है. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक समय-समय पर दखल देकर रुपये को बहुत ज्यादा गिरने से बचाने की कोशिश करता है, ताकि आम आदमी की जेब पर ज्यादा बोझ न पड़े.