बिहार चुनाव 2025
बिहार में कांग्रेस पुनः फ्लॉप शो साबित हुई है. चूंकि इस बार कांग्रेस को ये हार भारत के सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, बिहार में मिली है, उंगलियां पार्टी की कार्यप्रणाली पर उठ रही हैं और घूम फिर कर सवाल यही है कि आखिर कहां गायब हैं राहुल गांधी?
बिहार विधानसभा चुनावों के अंतर्गत मतों की गिनती जारी है. जैसे शुरुआती रुझान हैं एनडीए और सीएम नीतीश कुमार इतिहास रचने में कामयाब हुए हैं. जिक्र बिहार का हुआ है.ऐसे में हमारे लिए कांग्रेस और राहुल गांधी पर बात करना भी बहुत जरूरी हो जाता है. ध्यान रहे बिहार में कांग्रेस पुनः फ्लॉप शो साबित हुई है. चूंकि इस बार कांग्रेस को ये हार भारत के सबसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक, बिहार में मिली है, उंगलियां पार्टी की कार्यप्रणाली पर उठ रही हैं और घूम फिर कर सवाल यही है कि आखिर कहां गायब हैं राहुल गांधी?
ध्यान रहे, अभी बीते दिनों ही ये अफवाह उड़ी कि राहुल को अंतिम बार अपनी भतीजी और प्रियंका गांधी वाड्रा की बेटी मिराया वाड्रा के साथ लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर देखा गया था.
अभी इन अफवाहों को बल मिलता इससे पहले ही कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक ने तमाम दावों को खारिज करते हुए कहा कि गांधी और उनकी भतीजी का वायरल वीडियो सितंबर का है.
खैर, सुप्रिया श्रीनेत और रागिनी नायक कितना भी कुछ क्यों न कह लें. मगर बावजूद इसके सवाल अभी भी जस का तस है कि बिहार में कांग्रेस का मुख्य चेहरा माने जाने वाले विपक्ष के नेता राहुल गांधी आखिर कहां हैं?
बता दें कि जिस स्पीड से एनडीए बिहार में भारी जीत की ओर बढ़ रहा है, इंटरनेट और सोशल मीडिया मीम्स और सवालों से भर गया है और पूछा यही जा रहा है कि कहां हैं राहुल गांधी?
गौरतलब है कि पूर्व में यह अफ़वाहें थीं कि वह लंदन या मस्कट के लिए रवाना हो गए हैं. लेकिन जब पता किया गया तो कांग्रेस या किसी विश्वसनीय मीडिया की ओर से गांधी के लंदन या मध्य पूर्व जाने की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान नहीं आया.
एक ऐसे वक़्त में जब नीतीश की आंधी के कारण कांग्रेस की सेना लड़खड़ाने के बाद छितर गई हो. जनरल का इस तरह चुप्पी साधना और फिर गायब हो जाना, इस बात के स्पष्ट संदेश दे देता है कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में शायद ही कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का कुछ हो.
बहुत महत्वपूर्ण वक़्त पर राहुल गांधी के इस तरह गायब होने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि, 'जब तक राहुल गांधी विदेश में किसी दूसरे टाइम ज़ोन में जागेंगे, तब तक एनडीए यहां ट्रॉफी उठा चुका होगा.'
त्रिवेदी ने यह भी इशारा किया कि राहुल गांधी विदेश में हैं, लेकिन इसका कोई ठोस सबूत नहीं है.
जिक्र बिहार में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का हुआ है तो जिस तरह शुरुआती दौर में वामपंथी दल, भाकपा (माले) (एल) और माकपा, और एआईएमआईएम, इस सबसे पुरानी पार्टी से ज़्यादा सीटों पर आगे चले उसने कहीं न कहीं खुद जनादेश की पुष्टि कर दी है.
राहुल गांधी ने अपने महागठबंधन सहयोगी, राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ मिलकर बिहार में ज़ोरदार प्रचार किया.
उनकी वोट अधिकार यात्रा ने 16 दिनों में 1,300 किलोमीटर से ज़्यादा की दूरी तय करते हुए 23 ज़िलों की यात्रा की. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य मतदाता अधिकारों और स्थानीय लोगों से बातचीत करना था.
तो आखिर कहां पिछड़ी कांग्रेस
वोट अधिकार यात्रा के बाद बिहार में लोग तब संदेह में आए जब रैलियों में तेजस्वी यादव नौकरियों और रोज़गार की बात कर रहे थे, वहीं राहुल वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर (SIR) अभियान पर ज़ोर देते रहे.
कह सकते हैं कि यदि राहुल और तेजस्वी एक फ्रंट पर रहते तो शायद आज बिहार में महागठबंधन की स्थिति काफी अलग होती.
बहरहाल भले ही राहुल गांधी कांग्रेस और देश के बड़े नेता हों मगर जिस तरह एक राज्य के रूप में बिहार ने राहुल गांधी को आईना दिखाया ये खुद में साफ़ है कि नेता से जन नेता बनने में अभी उन्हें वक़्त तो लगेगा ही.