बिहार चुनाव 2025
क्या आप जानते हैं कि चुनाव में जमानत जब्त होना किसे कहते हैं और कितने वोट मिलने पर उम्मीदवार की जमानत राशि बच जाती है. यहां जानें सारी डिटेल्स...
बिहार चुनाव के नतीजे आने के बाद आप सबसे ज्यादा जो शब्द सुनेंगे वह जमानत जब्त होना ही होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका मतलब क्या है? भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आमतौर पर पांच साल के अंतराल पर चुनाव कराए जाते हैं. चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपनी योग्यता, कुल संपत्ति, वैवाहिक स्थिति जैसे डिटेल्स चुनाव आयोग को देना होता है.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 34 1 (ए) के अनुसार सामान्य कैटिगरी के उम्मीदवारों के लिए संसद का चुनाव लड़ने के लिए 25,000 रुपये और विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए 10,000 रुपये की जमानत राशि जमा करना अनिवार्य है. धारा 34(1)(ख) के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति के उम्मीदवारों को इन दोनों चुनावों के लिए केवल आधी-आधी राशि ही जमा करनी होती है. चुनाव आयोग के पास जमा की गई यह राशि चुनाव की सिक्योरिटी डिपॉजिट कहलाती है.
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 चुनाव के उम्मीदवारों की जमानत राशि वापसी के तरीकों के बारे में बताती है. इन्हीं तरीकों में से एक तरीका यह भी है कि भारत का चुनाव आयोग किस उम्मीदवार की जमानत जब्त करेगा. नियम के अनुसार अगर किसी उम्मीदवार को किसी निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध वोटों की संख्या के 1/6 भाग से कम वोट मिलते हैं तो उनकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है और चुनाव आयोग उनके 25,000 रुपये या 10,000 रुपये वापस नहीं करता.
नीचे बताई गई परिस्ठितियों में जमानत राशि वापस की जाती है-
1. अगर उम्मीदवार का नाम चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की लिस्ट में नहीं दिखाया गया है तो इसका मतलब है कि या तो उसका नाम चुनाव आयोग ने उनकी उम्मीदवारी अस्वीकार कर दी है या उम्मीदवार ने खुश अपना नाम वापस ले लिया है.
2. अगर मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवार की मृत्यु हो जाती है.
3. अगर उम्मीदवार चुनाव जीत गया है
4. अगर कोई उम्मीदवार जीता नहीं है लेकिन उसे निर्वाचन क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों के 1/6 से अधिक वोट मिले होते हैं.
5. अगर उम्मीदवार चुनाव जीत जाता है लेकिन उसे कुल वैध मतों का 1/6 भाग नहीं मिलता है तो भी उसकी जमानत राशि वापस कर दी जाती है.
सिक्योरिटी डिपॉजिट इसलिए जमा की जाती है जिससे सिर्फ गंभीर उम्मीदवार ही चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करें. हालांकि चुनाव आयोग का यह कदम ज्यादा कारगर नहीं है क्योंकि यह राशि बहुत कम है और बहुत से उम्मीदवार पैसे लेकर अपना नामांकन वापिस लेने के लिए भी नामांकन दाखिल करते हैं.
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