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भोजपुरी सितारों की राह पर मैथिली, कहीं सियासी टूल बनकर न रह जाएं!

मैथिली ठाकुर अगर बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ती हैं, तो उनके करियर पर असर पड़ सकता है. लेकिन मैथिली को लगता हो कि रजनीति के मैदान में आकर उनका करियर चमक सकता है.

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भोजपुरी सितारों की राह पर मैथिली, कहीं सियासी टूल बनकर न रह जाएं!

Maithili Thakur

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बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है. दो चरणों में होने वाले मतदान के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य में जैसी तमाम घटनाएं हो रही हैं जो स्वतः इस बात की पुष्टि कर दे रही हैं कि 2025 के इस चुनाव में बिहार में ऐसा बहुत कुछ होगा, जो सोच और कल्पना से परे रहेगा. सवाल होगा कैसे? तो इसे समझने के लिए हम उस घटना का रुख कर सकते हैं, जिसमें प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने भाजपा के चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की. 

मैथिली का बीजेपी के इस नेता से मिलना भर था चर्चा तेज हो गयी कि पार्टी उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में मौका देगी. अभी कयासों का दौर चल ही रहा था इसी बीच खबर आ गई है कि ठाकुर दरभंगा क्षेत्र की अलीनगर सीट से बिहार चुनाव लड़ सकती हैं.

यदि ऐसा है और मैथिली चुनाव लड़ती है तो हमें ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि मैथिली अपने करियर, अपने संगीत की हत्या की वजह स्वयः होंगी. बताते चलें कि रविवार को अपने एक्स हैंडल पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए, तावड़े ने बताया कि गायिका और उनका परिवार 1995 में लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में बिहार छोड़कर चले गए थे.

तावड़े के अनुसार वही बेटी अब बिहार की प्रगति देखकर वापस लौटना चाहती है. तावड़े ने कहा कि, 'वर्ष 1995 में बिहार में लालू राज के सत्ता में आने पर जिस परिवार ने बिहार छोड़ा था, उस परिवार की बेटी, सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर जी, बदलते बिहार को देखकर बिहार लौटना चाहती हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि आज केंद्रीय गृह राज्य मंत्री @nityanandraibjp जी और मैंने उनसे आग्रह किया कि बिहार की जनता और बिहार के विकास के लिए, बिहार के आम आदमी को उनसे योगदान की अपेक्षा है और वे उनकी अपेक्षाओं को पूरा करें. बिहार की बेटी मैथिली ठाकुर जी को हार्दिक शुभकामनाएं!"

अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट को फिर से शेयर करते हुए, मैथिली ठाकुर ने लिखा, 'बिहार के लिए बड़े सपने देखने वाले लोग, उनसे हर बातचीत मुझे दूरदर्शिता और सेवा की शक्ति की याद दिलाती है। हृदय से सम्मानित और आभारी हूं.'

जिक्र मैथिली का हुआ है तो ये बता देना भी बहुत जरूरी हो जाता है कि चुनाव आयोग ने मैथिली ठाकुर को बिहार का 'स्टेट आइकॉन' नियुक्त किया है, जो उनके प्रभाव और लोकप्रियता को दर्शाता है. उनकी यह मान्यता राज्य के लिए एक सांस्कृतिक राजदूत के रूप में उनकी भूमिका को रेखांकित करती है.

भारतीय शास्त्रीय और लोक संगीत में प्रशिक्षित, ठाकुर को बिहार के लोक संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 2021 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. 

जैसा कि हमने ऊपर बताया है यदि मैथिली चुनाव लड़ती हैं तो वो अपने करियर, अपने संगीत की हत्या की वजह स्वयः होंगी और ये बातें यूं ही नहीं हैं.  ऐसा कहने के लिए हमारे पास पार्यप्त कारण हैं.  आइये उन कारणों को कुछ बिंदुओं के जरिये समझें. 

क्या खुद को 'भोजपुरी सितारों' की तरह देख रही हैं मैथिली?
जिस तरह से सुर बदले हैं और मैथिली भाजपा के निकट आने के लिए नेताओं से भेंट कर रही हैं. एक बात तो साफ़ है कि वो पवन सिंह, मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव, खेसारी जैसे लोगों से प्रभवित हैं.

लगातार सुर्ख़ियों में छाई रहने वाली मैथिली को शायद ये लगता हो कि रजनीति के मैदान में आकर आकर उनका करियर ग्राफ चमक सकता है. 

यदि ऐसा ही है तो मैथिली को इस बात को याद रखना होगा कि नेता बनने के लिए जिस चीज की क़ुर्बानी उन्हें सबसे पहले देनी होगी वो उनका संगीत, उनका फोक होगा जोकि उनकी पहचान है. सवाल ये है कि राजनीति में आने के लिए मैथिली अपने संगीत से समझौता कर पाएंगी? मौजूदा वक़्त में सारे देश की नजर इस सवाल पर है.  

कहीं एक सियासी टूल न बनकर रह जाएं मैथिली?
ध्यान रहे पत्नी से विवाद के चलते सुर्खियां बटोर रहे पावर स्टार पवन सिंह के भाजपा में आने के बाद से ही पार्टी आलोचकों के निशाने पर है. चूंकि बात एक महिला की अस्मिता की है और बिहार में भारतीय जनता पार्टी की साइलेंट सपोर्टर महिलाएं हैं.  इसलिए भी भाजपा मैथिली के करीब आई है.

अब चूंकि मैथिली कला के क्षेत्र से हैं और अब तक राजनीति से दूर हैं. सवाल ये है कि चुनाव लड़ने के बाद कहीं वो एक सियासी टूल बनकर न रह जाएं. हम ये बात सिर्फ इस आधार पर कह रहे हैं कि पॉलिटिक्स न तो उनका न ही उनके परिवार का पेशा है.  

बतौर फैन जाते जाते हम बस इतना ही कहेंगे कि मैथिली उम्दा कलाकार हैं जिनका सिंगिंग करियर अभी शुरू हुआ है.  बेहतर ही कि राजनीति के मुकाबले मैथिली  सिंगिंग पर फोकस करें. हम ऐसा इसलिए भी कह रहे हैं कि जैसी गायकी मैथिली की है भविष्य में उन्हें कई अन्य कीर्तिमान स्थापित करने हैं.  

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