बिहार चुनाव 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण की वोटिंग संपन्न हो चुकी है. इस बार पिछले कई सालो की अपेक्षा मतदान प्रतिशत बेहतर रहा है. लेकिन मतदान प्रतिशत बढ़ने से किसे फयादा होगा, आइए जानते हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण पूरा हो चुका है. 6 नवंबर को हुए इस पहले चरण 121 सीटों के उम्मीदवारों की तकदीर ईवीएम में कैद हो चुकी है. गौरतलब है कि पहले फेज में 121 सीटों पर अभी तक सबसे ज्यादा मतदान हुआ है. इस बार इन सीटों पर 64.69 प्रतिशत वोट पड़े है. अगर 2020 की बात करें तो इन सीटों पर 56.1 प्रतिशत ही मतदान हुआ था. पहले चरण की वोटिंग पैटर्न के लिहाज से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान इस बार ज़्यादा हुआ है, जो बिहार के इतिहास में एक रिकॉर्ड बन गया. लेकिन इसका फायदा किसे होगा एनडीए या फिर महागठबंधन आइए जातने हैं.
जब-जब बिहार में मतदान प्रतिशत बढ़ा
पिछल 20 सालों का इतिहास बताता है कि जब-जब बिहार में मतदान प्रतिशत बढ़ा है तब-तब सरकार नीतीश के ईर्द-गिर्द रही है और अंत में नीतीश की ही वापसी हुई है. बिहार के पहले चरण की वोटिंग के आंकड़े को देखें तो यह साफ है कि बिहार में अभी तक की सबसे ज़्यादा वोटिंग हुई है. इससे पहले राज्य में सबसे अधिक मतदान साल 2000 के चुनाव में सामने आया था. तब पूरे बिहार में सर्वाधिक 62.57 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. बता दे कि बिहार के पहले चरण के मतदान को सियासी पक्ष अपने पक्ष में बता रहा है.
अपना-अपना राग सुना रहे सियासी दल
तो महागठबंधन का भी यही है महागठबंधन की तरफ से पहले को अपने पक्ष में बताया जा रहा है. महागठबंधन के नेता नीतीश सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर बता रहे हैं तो एनडीए अपने पक्ष में दावा कर रहा है. अगर वोटिंग परसेंट से आकलन किया जाए तो जब-जब बिहार में वोटिंग प्रतिशत 5 से ज्यादा बढ़ी है तब-तब सरकार में परिवर्तन हुआ है. हालांकि बिहार गठबंधन का स्वरूप भी अलग-अलग परिस्थियों में बदलता रहा है. 2015 में बिहार का सियासी समीकरण बदल गया. नीतीश कुमार बीजेपी का साथ छोड़कर आरजेडी से हाथ मिला लिया. 2015 चुनाव में 56.91 फीसद मतदान रहा था, जो 2010 की तुलना में 4.18 फीसदी मतदान ज्यादा रहा. इसका सीधा लाभ नीतीश के अगुवाई वाले महागठबंधन को मिला.
2015 और 2020 में क्या हुआ था?
अगर 2020 की बात करें तो जब 2020 में विधानसभा चुनाव हुए तो गठबंधन का स्वरूप फिर बदल गया. नीतीश कुमार आरजेडी-कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर एनडीए में घर वापसी कर गए. इस बार 57.29 प्रतिशत मतदान हुआ था. जो 2015 की तुलना में 0.38 फीसदी ज्यादा रही. हालांकि मतदान के मामूली वोट बढ़ोतरी ने एनडीए की सीटें जरूर कम की, लेकिन उसे सत्ता में बरकरार रखा.
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