चुनाव
केशव प्रसाद मौर्य यहां खुद को 'सिराथू का बेटा' बता रहे हैं तो वहीं पल्लवी पटेल खुद को 'सिराथू की बहू' बता रही हैं.
डीएनए हिंदी: उत्तर प्रदेश में चार चरण का मतदान हो चुका हैं. 27 फरवरी को होने जा रहे पांचवे चरण में राज्य के डिप्टी सीएम सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट पर मतदान होना है. सिराथू विधानसभा में मुकाबला दिलचस्प है. यहां 'बेटे' और 'बहू' के बीच टक्कर है. दरअसल केशव प्रसाद मौर्य यहां खुद को 'सिराथू का बेटा' बता रहे हैं तो वहीं पल्लवी पटेल खुद को 'सिराथू की बहू' बता रही हैं.
हाथी बिगाड़ सकता है अखिलेश का प्लान
केशव प्रसाद मौर्य को उनके ही इलाके में घेरने के लिए अखिलेश यादव ने बड़ा प्लान बनाया है. अखिलेश ने यहां अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को अपने चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतारा है. दरअसल अखिलेश इसके जरिए पटेल, यादव और मुस्लिम वोटों को एकजुट करना चाहते हैं.
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मायावती का हाथी यहां सपा की परेशानियां बिगाड़ता दिखाई दे रहा है. बसपा प्रमुख मायावती ने इस सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है. ऐसे में यहां मुस्लिम वोट सपा और बसपा के बीच में बंट सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा फायदा केशव प्रसाद मौर्य को मिलना तय है.
पटेल वोटों में भी सेंध लगाएंगे केशव!
एक तरफ जहां पल्लवी पटेल के जरिए सपा पटेल वोटों को अपने पाले में करना चाहती है तो वहीं सियासत के बड़े खिलाड़ी केशव प्रसाद मौर्य ने उनकी काट करने के लिए पल्लवी की बहन और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को ही सिराथू बुला लिया.
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भाजपा ने यहां अनुप्रिया पटेल से प्रचार कराकर मुकाबले को 'बहन vs बहन' में बदल दिया. अनुप्रिया पटेल ने सिराथू में न सिर्फ केशव के पक्ष में जमकर प्रचार किया बल्कि उनके चुने जाने पर सिराथू में होने वाले विकास पर भी जमकर चर्चा की.
बूथ मैनेजमेंट पर खास फोकस
सिराथू में भाजपा पिछले दो चुनाव विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है. ऐसे में यहां भाजपा का संगठन मजबूत है. दूसरी तरफ गठबंधन के तहत यह सीट अपना दल कमेरावादी के खाते में गई है. अपना दल कमेरावादी यहां पूरी तरह से सपा पर ही निर्भर है.
भाजपा यहां बूथ मैनेजमेंट पर खास फोकस कर रही है. पार्टी द्वारा यहां पन्ना प्रमुख की रणनीति अपनाई गई है. सिराथू सीट पर केशव प्रसाद मौर्य को जीत दिलाने की जिम्मेदारी 3500 से अधिक पन्ना प्रमुख निभा रहे हैं. पार्टी ने सिराथू को चार मंडल- सिराथू, कसिया, अझुआ और कड़ा में बांटा है, जहां 67 शक्ति केंद्र और 432 बूथ हैं. हर बूथ पर करीब 8 लोगों को सक्रिय भूमिका में रखा गया है.
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