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Motherhood : बच्चा तभी जब मां पूरी तरह खुशनुमा और मानसिक रूप से तैयार हो

प्रेगा न्यूज़ के एड के बाद रूपम गंगवार सामाजिक दृष्टिकोण से बच्चा होने के पक्षों पर बात रख रही हैं.

Motherhood : बच्चा तभी जब मां पूरी तरह खुशनुमा और मानसिक रूप से तैयार हो
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बच्चा सिर्फ इसलिए नहीं पैदा कर लेना चाहिए ताकि-

- औरत होना सिद्ध हो सके,

- लेट होने पर दिक्कत होगी,

- पुत्र की चाह में (ये वाला सबसे घटिया है)

- शादी हो गई तो नेक्स्ट स्टेप बच्चे वाला जरूरी है

- बुढ़ापे का इन्वेस्टमेंट

- बच्चा पैदा नहीं किया तो इंसानी नस्ल खत्म हो जाएगी...आदि आदि

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ज़रुरी है कि बिना किसी तैयारी के बच्चे न पैदा किए जाएं

इंसानी नस्ल वैसे भी विस्फोटक स्थिति में है, और बच्चे खूब पैदा हो ही रहे हैं. और रही बात बुढ़ापे का इन्वेस्टमेंट समझने की तो हर इंसान का अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व होता है, जन्म से पहले ही किसी की जिम्मेदारियों को निर्धारित कर देना अनुचित है. वैसे भी बुढ़ापे के इन्वेस्टमेंट की यह उम्मीद टूटती ही है, हर अगली पीढ़ी पिछली पीढ़ी से स्वार्थी का तमगा पाती है.

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आने वाला भविष्य हर अगली पीढ़ी के लिए दुरुहतर होता जा रहा है, इसलिए बेहतर है कि बिना किसी तैयारी, बिना जिम्मेदारी, सिर्फ़ कुछ कारणों से बच्चे पैदा न किये जायें. बच्चा तभी जब मां पूरी तरह खुशनुमा और बच्चा जन्मने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो.

(रूपम गंगवार कलाकार हैं और खुलकर स्त्री विमर्श के मुद्दों पर लिखती हैं.)

(यहां प्रकाशित विचार लेखक के नितांत निजी विचार हैं. यह आवश्यक नहीं कि डीएनए हिन्दी इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे और आपत्ति के लिए केवल लेखक ज़िम्मेदार है.)

  

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